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अँधेरे में पड़ौसी के लड़के के साथ

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प्रेषक :- अंकिता…

हाय फ्रेंड्स, कैसे हो आप लोग मैं अंकिता आज अपनी जिन्दगी के एक मज़ेदार सेक्स अनुभव को लेकर कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से आपके सामने हूँ। मुझे उम्मीद है कि, आपको मेरी यह कहानी जरूर पसन्द आएगी. दोस्तों अगर मिया-बीवी आपस में एक-दूसरे से खुले हो और एक-दूसरे की इच्छाओं की इज्जत करते हो तो जिन्दगी बहुत ही आसान हो जाती है। मेरे और मेरे पति नवीन के बीच में कुछ भी छुपा हुआ नहीं है और इसी वजह से हम दोनों को कोई मजेदार सेक्सी मौका मिलता है तो हम उसे नहीं छोड़ते है। दोस्तों आज मैं आपको बताने जा रही हूँ कि, किस तरह से मेरे पड़ोसी गुप्ता जी के लड़के ने लाइट का फायदा उठाकर मेरी गांड को चाटा और मेरे सारे छेदों की बहुत ही मस्त तरीके से चुदाई करी थी।

दोस्तों मेरी उम्र 36 साल की है और मेरा फिगर देखकर तो अच्छे-अच्छे मर्दों का लंड अपना पानी निकाल देता है. मेरे बब्स 34” के है, कमर 32” और गांड 36” की है और मेरी मदमस्त चाल को देखकर मेरी पीठ पीछे लोग आहें भरते है चाहे वह हमारे पडौसी हो, दूध वाला हो, सिक्योरिटी गार्ड हो या फिर मेरे ऑफिस में मेरे साथ काम करने वाले लोग हो। दोस्तों मुझको इस बात का पता था और जब लोग मुझे घूर घूरकर देखते है तो, मेरे दिल में एक अजीब सी ठंडक महसूस होने लगती है. दोस्तों यह बात ज्यादा पुरानी नहीं है बस कुछ महीने पुरानी ही है और तब नवीन अपने ऑफिस की एक पार्टी में गये हुए थे और वहाँ से रात को देर से आने वाले थे और उस समय मैं अपने घर में अकेली ही थी और फिर अचानक से लाईट चली गई थी उस समय रात के 10.30 बज रहे थे और मुझे उस समय कहीं भी कोई इलेक्ट्रीशियन नहीं मिलने वाला था और फिर मैंने नवीन को फोन किया तो नवीन ने फोन नहीं उठाया तो फिर मैंने पड़ोस में जाकर गुप्ता जी के घर की घंटी बजाई तो दरवाजा उनके बेटे नितिन ने खोला था और फिर जब मैंने नितिन को अपनी परेशानी बताई तो वह मुझसे बोला कि, आंटी पापा तो सो गये है मैं चलकर देख लेता हूँ। और फिर नितिन उनके घर से बाहर आ गया और फिर वह मेरे पीछे-पीछे आने लगा. शायद मेरी मटकती हुई चाल ने उसको मदमस्त कर दिया था। दोस्तों उस समय मैंने एक पारदर्शी हल्के कपड़े की नाइटी पहनी हुई थी और ऊपर से बस एक शॉल डाल रखी थी. शॉल ने मेरे ऊपर का भाग तो ढक दिया था, लेकिन मेरी गांड नीचे से शायद ठीक से नहीं ढक पाई थी और उसने अपने घर की रोशनी में शायद मेरी गांड का वह भाग देख लिया था और फिर मेरे घर आकर वह लाईट के बोर्ड के पास गया और फिर वह मुझसे बोला कि, आंटी फ्यूज उड़ गया है उसको बदल देता हूँ आप मुझको फ्यूज के लिये एक तार और प्लायर दे दीजिए। दोस्तों मैंने घर में मोमबत्ती जलाई हुई थी और फिर मैंने अपनी शॉल को कुर्सी पर छोड़ा और फिर मैं उसका बताया सामान लेने के लिये दूसरे कमरे में चली गई थी. और फिर जब मैं वापस आई तो मैं एकदम से चौंक गई थी. उस समय नितिन अपने सारे कपड़े उतारे हुए था और वह केवल अपनी अंडरवियर में ही था और उसके लंड से उसके अंडरवियर में तम्बू बना हुआ था और वह अपने लंड को अपने एक हाथ से सहला रहा था और वह उसको बड़ी बेरहमी से खींच रहा था. और फिर मुझे देखते ही उसने मुझे आकर पकड़ लिया था और फिर अपनी बाहों में उठा लिया था।

तो फिर मैंने उसको ज़ोर से खींचकर एक थप्पड़ रसीद किया तो फिर उसने मुझे वहीं सोफे पर पटक दिया था और फिर बाहर जाकर उसने घर का मेन गेट अन्दर से बन्द कर लिया था. और फिर जब वह वापस आया तो मैं डरी और सहमी हुई सी नवीन को फोन लगा रही थी, लेकिन मेरे हाथ काँप रहे थे. और फिर नितिन ने मेरे हाथ से मेरा मोबाइल ले लिया और बोला कि, नाटक कर रही है कब तुझे किसने चोदा है मैं सब जानता हूँ। बहुत दिनों से मैं भी मौका तलाश कर रहा था और आज किस्मत ने मुझे वह मौका दिया. आज मैं तुमको नहीं छोड़ूँगा. दोस्तों उस समय मुझको बहुत डर लग रहा था, क्योंकि वह बहुत जोश में लग रहा था और पता नहीं वह मेरे साथ क्या करेगा? और फिर वह मेरे पास आया और उसने एक ही बार में मेरी नाइटी फाड़ दी थी और उससे मैं एकदम से पूरी नंगी हो गई थी क्योंकि मुझे नाइटी के नीचे ब्रा और पैन्टी पहनकर सोने की आदत नहीं है. उस दिन लाइट चले जाने के चक्कर में मुझे कुछ भी ध्यान ही नहीं रहा और मैंने नितिन को बुलाने से पहले अपने कपड़े भी नहीं बदले थे। मोमबत्ती की रौशनी में मेरा शरीर सोने की तरह चमक रहा था और वह मुझको देखकर मुस्कुरा रहा था और उसकी आँखो में एक अजीब सी चमक थी. और फिर वह मुझसे बोला कि, साली, जिस-जिसने भी तुझको चोदा होगा वह दुनिया का सबसे खुशकिस्मत आदमी होगा, और आज मैं भी बन जाऊँगा।

और फिर वह मेरे पास आ गया और फिर मेरे बालों को पकड़कर मेरे मुहँ को अपने लंड पर अपनी अंडरवियर के ऊपर से रगड़ने लगा. उसके लंड में से पैशाब की बदबू आ रही थी. और उसने मेरे बालों को बहुत ज़ोर से खींचा हुआ था और मुझे लग रहा था कि, कुछ ही देर में मेरे बाल उसके हाथ में निकल जाएँगे. और फिर मैंने उसको कहा कि, नितिन मुझे बहुत दर्द हो रहा है तो नितिन हँसने लगा और फिर उसने मेरे सिर को अपने लंड पर और ज़ोर से दबा दिया और फिर तो वह भी अपनी गांड को हिला-हिलाकर मुझे अपने लंड से आ रही पैशाब की बदबू को सूँघा रहा था. मैं उस समय कुछ नहीं कर पा रही थी और मैं एकदम बेबस थी उसके आगे। और फिर उसने मुझे पीछे कर दिया और फिर उसने एकदम से अपना अंडरवियर भी उतार दिया था और फिर उसका फनफनाता हुआ लंड मेरे मुहँ के आगे लहराने लगा था. दोस्तों मुझे नहीं पता था कि, पडौस वाले गुप्ता जी के बेटे का लंड इतना बड़ा होगा, देखने में तो वह एकदम शरीफ लगता था। और फिर उसके लंड को देखकर मेरी चुदासी आँखों में एक बिजली सी कौंध गई थी और मेरे होठों पर पानी आ गया था और फिर नितिन मुझसे बोला कि, मज़ा आ गया ना देखकर ही है ना एकदम मस्त और जवान लंड?

दोस्तों सही कह रहा था वह, वह केवल 24 साल का था और उसके गोरे रंग के लंड पर हल्का सा कालापन था. और फिर वह अपने लंड को मेरे सारे मुहँ पर फेर रहा था उसका लंड मेरे मुहँ पर हर जगह मेरी आँखों पर मेरे होठों पर और मेरी नाक पर भी लग रहा था और फिर तो मैं भी धीरे-धीरे गरम होने लग गई थी और मुझे अपनी चूत पर थोड़े गीलेपन का एहसास होने लग गया था और मेरे बब्स के निप्पल भी कड़क होने शुरू हो गये थे। और फिर नितिन मेरी इस हालत को देखकर बोला कि, लगता है तेरे भी अरमान जाग गए है, और फिर वह हँस पड़ा था. दोस्तों अब तो मेरे चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान आ गई थी. और उस समय मुझे लग रहा था कि, मैं नितिन को बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊँगी। और फिर मैंने नितिन के लंड को अपने एक हाथ से पकड़ लिया और फिर मैं उसको मसलने लगी. मेरे हाथ की ताक़त और गर्मी पाकर उसके लंड ने और भी झटके मारने शुरू कर दिए थे। दोस्तों नितिन भी मस्ती में आकर अपनी गांड को चला रहा था और साथ ही वह मुझसे बोल रहा था कि, आह… बहुत खूब इस्सस… और फिर मैंने एकदम से आगे बढ़कर गप से उसके लंड को अपने मुहँ में ले लिया और फिर मैं मस्ती से उसको चूसने लग गई थी. नितिन ने उस समय अपना एक हाथ अपनी गांड पर रखा हुआ था और दूसरे हाथ से उसने मेरे बालों को पकड़ा हुआ था. और फिर वह अपनी गांड को हिला-हिलाकर मेरे मुहँ को चोदने में लगा हुआ था. उसका लंड बहुत ही तेज़ी से सटा-सट मेरे मुहँ के अन्दर-बाहर हो रहा था और कभी-कभी तो उसका लंड मेरे गले तक भी पहुँच जाता था. और मैं पागलों की तरह उसके लंड को हाथ से मसलती भी जा रही थी और मस्ती से चूस भी रही थी. और फिर 10 मिनट ही हुए होंगे कि, उसके लंड ने बहुत ही गरम-गरम सी वीर्य की धार मेरे मुहँ में ही छोड़ दी थी. उसका तेज़ स्पीड से निकला वीर्य झट से मेरे गले से टकराया और फिर वह मेरे गले से नीचे उतर गया था। और फिर मैंने उसके लंड को पूरा का पूरा चूसकर साफ़ कर दिया था. और फिर मैंने उसके लंड को अपने मुहँ से बाहर उगल दिया था. और फिर नितिन के चेहरे से पसीना टपकने लग गया था. और फिर उसने मुझे सोफे से लगाकर उल्टा खड़ा कर दिया, तो मैंने उसको बोला कि, मैं तुमको मेरी गांड नहीं मारने दूँगी तो फिर वह मुझसे बोला कि, हाँ ठीक है छिनाल, पहले पलट तो सही। और फिर वह अपने घुटनों पर बैठ गया था और फिर वह अपने दोनों हाथों से मेरे कूल्हों को फैलाने लगा तो मुझे एकदम से दर्द हुआ तो मैंने अपनी गांड आगे कर ली थी. और फिर उसने फिर से मेरी गांड को पकड़ा और फिर मेरी दोनों टाँगों के बीच में से आकर उसने अपनी जीभ को मेरी चूत पर रख दिया था. आहहह… इस्सस… ऐसा तो दोस्तों आज तक मैंने किसी भी चुदाई में नहीं देखा था। उसकी जीभ नीचे से सीधे ही मेरी चूत में घुस गई थी और उस समय मुझको ऐसा लगा कि, जैसे किसी ने कोई धारदार छुरी नीचे से एकदम से मेरी चूत में घुसा दी हो. मैं तो मरने ही लग गई थी. और फिर मैं अपनी गांड को हिला-हिलाकर उसकी जीभ को अपनी चूत से बाहर निकालने लग गई थी लेकिन उसने मेरी जाँघों को कसकर पकड़ा हुआ था और उस वजह से मैं ज्यादा हिल भी नहीं पा रही थी. और फिर वह अपनी जीभ से मेरी चूत की अन्दर की दीवारों को चाटने में लगा हुआ था. मैं तो उस समय बस पागल सी हुई जा रही थी. और फिर मैं ज्यादा देर तक खुद पर काबू नहीं कर पा रही थी तो मैंने उसको कहा कि, बस नितिन, अब और नहीं चोद डालो मुझे अब, बहुत खुजली होने लगी है मेरी चूत में अब। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

लेकिन नितिन ने मेरी बात को नज़र अन्दाज़ कर दिया था पर उसने अपनी जीभ मेरी चूत से हटा ली थी. और फिर उसने अपनी जीभ को मेरी गांड के छेद पर रख दिया था और फिर अब वह उसको चाटने लग गया था उउउहहह… क्या मस्त अहसास था दोस्तों. और फिर वह मेरी गांड के छेद के आस-पास की जगह को चाट रहा था. और फिर साथ ही साथ उसने अपनी एक ऊँगली से मेरी चूत को भी रगड़ना शुरू कर दिया था. उफ्फ्फ… इस्सस… ओह्ह्ह… उसकी जीभ मेरी गांड के छेद पर और उसकी ऊँगली मेरी चूत के छेद पर थी. उस समय मैं तो बस पागल ही हो चुकी थी. और फिर मैंने अपने हाथ से अपने बब्स दबाने शुरू कर दिए थे और साथ ही मैं अपने होठों को अपने दाँतों से काट भी रही थी. और साथ ही मैं पागलों की तरह अपनी गांड को नितिन के मुहँ पर घुमा रही थी. दोस्तों उस समय वहाँ पर पूरे माहौल में हम दोनों की सिसकारियाँ और आहें गूँज रही थी और साथ ही मेरी साँसें बहुत तेज़-तेज चल रही थी. और फिर अचानक से मेरे शरीर ने अकड़ना शुरू कर दिया और मुझे अपनी चूत से अपना गरम माल बाहर बहने का एहसास हुआ. बहुत गाढ़ा और बहुत सारा था वह। नवीन या किसी और के साथ जब भी मैंने सेक्स किया था तब भी मेरा इतना सारा माल बाहर नहीं आया था। और फिर मेरा सारा माल उसकी ऊँगली के साथ मेरी चूत से बाहर आ गया था. और फिर तो मैं एकदम से पागल सी हो चुकी थी और मुझसे अब बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था. और फिर मैंने एकदम से मुड़कर नितिन के बालों को खींचा और फिर उसको खड़ा करके उसके लंड को खींचने लगी. वह उस समय मुस्कुरा रहा था मेरी बैचेनी पर. पर मैं भी क्या करती क्योंकि वह था ही इतना अच्छा और माहिर, किसी भी लड़की या औरत को वह एकदम से अपना दीवाना बना ले। दोस्तों आज तक मैंने सेक्स तो कई लोगों के साथ किया था लेकिन प्यार सिर्फ़ नवीन से किया था. लेकिन आज मुझे फिर से नितिन से भी प्यार होने लग गया था. और फिर नितिन ने मुझे सोफे के किनारे को पकड़कर घोड़ी बना दिया था. और फिर उसने मेरी चूत को अपने दोनों हाथों से खोलकर उसपर थूक दिया था. और फिर थोड़ा सा थूँक अपने हाथ में भी लेकर उसने अपने लंड को रगड़कर गीला कर दिया था. और फिर वह अपने एक हाथ से अपने लंड को मेरी चूत पर सेट करने लगा और रगड़ने लगा था. दोस्तों उस समय मैं बहुत ही ज्यादा बेचैन हो गई थी और फिर एक ज़ोरदार धक्के के साथ उसने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया था।

मेरी साँस एकदम से अटक गई थी. उसने मुझे संभलने का मौका भी नहीं दिया और फिर से एक और ज़ोरदार धक्का मारा और उसका लंड सीधा मेरी बच्चेदानी से टकरा गया था और मेरे मुहँ से ज़ोर से आहहह… की आवाज़ निकल गई थी और मैं सोफे के साइड में गिरने ही वाली थी कि, उसने मुझे थामकर खड़ा कर दिया था और फिर तो मस्ती में आकर वह ज़ोर-जोर से धक्के मारने लग गया था और उस समय मैंने भी सोफे को कसकर पकड़ा हुआ था क्योंकि उसके धक्के का दबाव बहुत ज्यादा था और मैं सम्भल नहीं पा रही थी. और वह पूरे जोश के साथ ज़ोरदार धक्के मार रहा था। उस जबरदस्त चुदाई से मेरे बब्स भी मस्ती में हवा में झूल रहे थे और मेरे मुहँ से लार टपक रही थी. दोस्तों उस समय मुझे नहीं पता था कि, मैं कितनी बार झड़ चुकी थी. लेकिन 10-15 मिनट के बाद मैं उसके लंड को और लेने की हालात में नहीं थी. और फिर नितिन के धक्कों की स्पीड और बढ़ गई थी और फिर अगले 5-7 मिनट के बाद उसने एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना सारा माल मेरी चूत में ही गिरा दिया था. दोस्तों उसका माल बहुत ही ज्यादा गरम था, जैसे कि, कोई लावा मेरे अन्दर फूट पड़ा हो. दोस्तों वह जवान था इसलिए उसके वीर्य की गर्मी बहुत ज्यादा थी।

और फिर उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर नहीं निकाला था और जब उसके लंड ने अपना पूरा पानी मेरी चूत में निकाल दिया तब उसने उसके लंड को बाहर निकाल लिया था. उसके बाद मेरी ज्यादा देर तक खड़ी रहने वाली हालत नहीं थी और मुझे डर भी लगने लगा था क्योंकि नवीन अब कभी भी आ सकता था. तो फिर मैंने नितिन को कहा कि, चल नहीं सकती. प्लीज़ मुझे कपड़े पहनाकर बेडरूम में पलंग पर लिटा दो और लाइट भी सही कर दो, नवीन के पास दूसरी चाभी है, वह अन्दर आ जाएँगे और फिर नितिन ने मुझे कपड़े पहनाकर वहीँ बैठाया और लाईट सही कर दी थी. और फिर नितिन मुझे बेडरूम में लिटाकर चला गया था. मैं उस चुदाई से बहुत थक गई थी और मुझे पता भी नहीं चला कि, नवीन कब आया लेकिन फिर जब मैं सुबह उठी तो मैं बहुत खुश थी क्योंकि इतने जवान लंड से इतनी मस्त चुदाई मेरी बहुत समय के बाद हुई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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