✽ रोजाना नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ ✽

आंटी की जवानी का शोला भड़काया

0
loading...

प्रेषक :- विनीत…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम विनीत है। मैं नागपुर का रहने वाला हूँ और मैं हैदराबाद में एक कम्पनी में नौकरी करता हूँ। अब मैं आपका ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ। मैं स्मार्ट और सुन्दर दिखने वाला जवान लड़का हूँ, मेरी लम्बाई 5.8 फुट की है, मेरा वजन 65 किलोग्राम है और मेरी अच्छी बॉडी और लम्बा और गर्म लंड है। मेरी उम्र 28 साल की है। दोस्तों मेरी यह कहानी कुछ इस तरह से।

यह कहानी आज से 2 साल पहले की है और तब मैं हैदराबाद शहर में नया था तो मुझको नया होने की वजह से अच्छे और बुरे का ज़्यादा कुछ नहीं पता था. इसलिए मैं वहाँ पर ज़्यादा घूम भी नहीं पाता था पर हाँ, अपने शरीर को ठीक रखने के लिए मैं रोज एक पार्क में सुबह-सुबह घूमने जाता था. वहाँ पर रोज ही मेरा इस तरह से घूमना चलता था और मुझको वहाँ पर एक 38 साल की औरत भी हर रोज ही मिलती थी जो कि, अपने बच्चों के साथ होती थी. और फिर धीरे-धीरे हम एक दूसरे को हाय, हैल्लो करने लग गये थे. और फिर कुछ दिनों के बाद मुझको पता चला कि, उनका नाम नंदिता है. नंदिता आंटी दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत थी और वह अपने बच्चों के साथ काफी खुश भी रहती थी और मैं भी उनके बच्चों को हँसाता रहता था. और फिर ऐसे ही एक महीना गुजर गया था और फिर उनसे बात करने से मुझको यह भी पता चला कि, उनके पति कुछ साल पहले ही उनको बिना बताए घर से कहीं चले गए थे जो आज तक वापस नहीं आए थे. और इसीलिए वह घर में अकेली ही रहती है. और उनका एक ही बेटा है और वह भी अपने काम के चलते बैंगलोर में रहता है. और फिर एक दिन आंटी सुबह पार्क में घूमने अकेली ही आई और वह उस समय कुछ उदास भी लग रही थी. तो फिर मैं उनको उदास देखकर उनके पास चला गया और मैंने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा. तो उन्होंने मुझको बताया कि, उनके पौता-पौती अब उनके घर वापस चले गये है क्योंकि उनकी छुट्टियाँ खत्म हो गई है।

और फिर ऐसी बात सुनकर मैं उनको दिलासा देने लग गया था और तब जाकर वह थोड़ा समझी और फिर ऐसे ही हमारी दोस्ती पक्की हो गई थी. और फिर तो मैं रोज ही उनको पार्क में मिलता और हम रोज खूब बातें करते थे. और यहाँ तक ही नहीं बल्कि मैं उनके घर पर भी जाने लग गया था. दोस्तों हफ्ते में दो बार तो मेरा उनके घर पर जाना हो ही जाता था. और हम दोनों बैठकर काफी बातें भी करते थे. और कभी-कभी वह मेरे लिए उनके घर पर ही खाना भी बना देती थी जिसको मैं उनके साथ बैठकर बड़े मज़े से ख़ाता था. और फिर ऐसे ही काफी समय बीत गया था. और फिर एक दिन अचानक मुझको आंटी का फोन आया तो आंटी मुझसे बोली कि, आज मेरा बर्थ-डे है तो प्लीज़ तुम शाम को मेरे घर पर आ जाना. और फिर आंटी की यह बात सुनकर मैंने पहले तो उनको बर्थ-डे विश किया और फिर मैंने शाम को आंटी से उनके घर पर आने का वादा भी किया. और फिर मैं सुबह तो अपने काम पर चला गया था और फिर वापसी में मैंने आंटी के लिए एक बहुत ही प्यारा सा तोहफा भी ले लिया था. और फिर मैं अपने ऑफीस से सीधा उनके घर पर चला गया था. और फिर जैसे ही मैं वहाँ पहुँचा तो मैंने उनके घर के दरवाजे की घंटी बजाई तो आंटी ही दरवाजा खोलने आई थी और आंटी मुझको देखकर बहुत खुश हुई थी. और फिर मैंने भी उनको उनका बर्थ-डे विश कर दिया था. दोस्तों वह मुझको देखकर खुश क्या काफी खुश लग रही थी. और फिर मैं भी उनकी तरफ मुस्कुरा दिया था और फिर मैं उनके साथ अन्दर उनके घर में जाकर बैठ गया था. और फिर उन्होंने मुझको कोल्ड ड्रिंक पिलाई और साथ ही मैंने कुछ नाश्ता भी किया. मुझे उनकी पार्टी बहुत अच्छी लगी थी, पार्टी में उन्होंने मेरे अलावा किसी और को नहीं बुलाया था. और फिर मैंने उनको गिफ्ट भी दे दिया था। दोस्तों गिफ्ट पाकर वह बहुत खुश हुई थी और फिर वह उस गिफ्ट को खोलने लग गई थी. और फिर जैसे ही गिफ्ट खुला तो उन्होंने देखा कि, उसमें एक बहुत ही प्यारी सी मूर्ती थी. जिसको देखकर वह बहुत खुश हुई।

loading...

और फिर हम दोनों बैठकर के टी.वी. देखने लग गये थे पर वह टी.वी. में आंटियों वाला कोई सीरियल देख रही थी और जिसको देखकर मेरा तो बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था. और फिर इसलिए मैंने आंटी को बोला कि, आंटी कोई दूसरा चैनल लगाओ ना यह सब तो मुझको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है. और फिर मेरी बात को सुनकर आंटी ने मुझे रिमोट दे दिया और फिर वह खुद तो नहाने का कहते हुए मुझसे बोली कि, वहाँ टी.वी. के नीचे सी.डी. भी पड़ी हुई है उनमें से तुमको जो भी अच्छी लगे उसको तुम लगाकर देख लो। और फिर आंटी मुझसे यह कहकर नहाने के लिए चली गई थी. और फिर उनके जाते ही मैं टी.वी. के पास गया और फिर मैं उन सी.डी. की कैसेट को देखने लग गया था. और तभी मुझको वहाँ पर काफी सेक्सी सी.डी. भी मिली थी. और फिर उनमें से एक को मैंने लगा लिया था और फिर मैं सोफे पर बैठकर वह सेक्सी फिल्म देखने लग गया था. और फिर कुछ समय के बाद आंटी नहाकर बाथरूम से आई तो उन्होंने मेरे सिर पर 2 थप्पड़ मारते हुए कहा कि, तुम यह सब क्या देख रहे हो? मैंने तो तुमको एक बहुत अच्छा लड़का समझा था. और फिर जैसे ही मैंने आंटी को देखा तो दोस्तों मैं तो अपने होश ही खो बैठा था, क्योंकि दोस्तों उन आंटी ने उस समय लाल रंग की एक बहुत प्यारी सी साड़ी डाल रखी थी और जिसमें वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

मैं :– आंटी आप ही ने तो मुझसे यह कहा था ना कि, “तुमको जो भी देखना है देख ले. और वैसे भी उन सभी सी.डी. में यही सब है।

और फिर मेरी बात को सुनकर आंटी एकदम चुप हो गई थी. और फिर कुछ देर के बाद वह मुझसे बोली कि, चल ठीक है जो देख रहा है देख ले और फिर इतना कहकर आंटी तो अन्दर चली गई थी और मैं फिर से टी.वी. देखने में मग्न हो गया था. दोस्तों वह फ़िल्म इतनी सेक्सी थी कि, मुझको पता ही नहीं चला कि, कब मैंने अपने लंड को अपनी पेन्ट से बाहर निकाल लिया था. और फिर मैं अपने लंड को ऊपर-नीचे करने लग गया था और मुझको तो यह भी पता नहीं चला था कि, आंटी भी मेरे पीछे से खड़ी होकर कब से वह सब देख रही है. और फिर आंटी ने जैसे ही मेरे कन्धे पर अपना हाथ रखा तो मैं तो एकदम से ठण्डा पड़ गया था. और फिर जैसे ही मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उस समय आंटी सिर्फ़ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी. और फिर उनको देखते ही मैंने अपनी आँखें एकदम से बन्द कर ली थी और फिर मैंने उनको कहा कि…

मैं :– आंटी आप ऐसे क्या कर रही हो।

और फिर आंटी ने मेरी बात को सुने बिना ही मेरे सिर को पकड़ा और फिर उन्होंने मेरे होठों को अपने होठों में भर लिया था. पहले तो मैंने भी खुद को उनसे छुड़वाने की बहुत कोशिश करी पर बाद में मैं भी उनका साथ देने लग गया था. और फिर मैं भी उनके होठों को चूसने लग गया था और साथ ही मैं उनके बदन पर अपना हाथ भी फेरने लग गया था. और फिर लगभग 10 मिनट तक हमारी चूमा-चाटी चली और फिर आंटी ने मुझसे कहा चलो आओ पहले हम बिरयानी खा लेते है. और फिर मैं आंटी की बात को सुनकर आंटी के साथ खाने की टेबल पर आकर बैठ गया था और फिर हम दोनों बैठकर खाना खाने लग गए थे. और फिर खाना खाने के बाद आंटी ने मुझे उनके कमरे में आने का इशारा किया जिसको मैं समझ गया था और फिर मैं भी उनके कमरे में चला गया था. और फिर उनके कमरे में पहुँचते ही मैंने आंटी के कपड़े उतार दिए थे. दोस्तों उस समय आंटी ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी इसलिए उनके ब्लाउज के खुलते ही उनके बब्स एकदम से बाहर आ गये थे. जिनको मैंने एक-एक करके अपने मुहँ में भर लिया था और फिर मैं उनको चूसने लग गया था. दोस्तों मेरे ऐसा करने से आंटी भी मदहोश होती हुई मेरे बालों को पकड़कर नोचने लग गई थी. दोस्तों मेरे बालों को नोचते हुए आंटी ने मेरे लंड को भी एक हाथ में पकड़ लिया था. और फिर उन्होंने उसको अपने मुहँ में भी भर लिया था. उनके मुहँ में मेरे लंड जाते ही मैं तो उनको अपना लंड चुसवाने लग गया था. लेकिन उनकी चूत की तड़प भी बहुत बढ़ गई थी. इसलिए उन्होंने जल्दी ही मेरे लंड को अपने मुहँ में से बाहर निकाल दिया था। और फिर मैं भी उनका इशारा समझ गया था. तो फिर मैं भी उनकी चूत को चाटने लग गया था और उसको चाटते-चाटते मैंने उनके झड़ने पर उनकी चूत का पानी भी पी लिया था. और फिर मैं अपने लंड को उनकी चूत पर रखकर रगड़ने लग गया था जिससे आंटी एकदम से तड़प उठी थी. और फिर जैसे ही उन्होंने एकबार और आहं भरी तो मैंने एक ही धक्के में अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों मेरा लंड उनकी चूत में जाते ही आंटी एकदम से चीख पड़ी थी. और फिर 5-7 मिनट तक उनके ऊपर ही एकदम चित्त होकर लेटने के बाद मैंने अपने चोदने की स्पीड थोड़ी और बड़ा दी थी. हम दोनों ही एक-दूसरे की चुदाई में खूब मदहोश हो उठे थे. और फिर मैंने उनको घोड़ी बनाकर उनकी चूत को खूब चोदा था. जिससे हम दोनों के चूत और लंड का सफ़ेद रस निकल गया था. और फिर हम दोनों ने थोड़ा आराम किया था. लेकिन मेरा अभी एक और बार करने का मन कर रहा था इसलिए अब उन्होंने मुझसे कहा कि, अब तू मेरी गांड मार ले. तो फिर मैंने वैसे ही उनको घोड़ी बनाकर उनकी गांड में अपने खड़े लंड को डाल दिया था और फिर मैं उनको धका-धक चोदने लग गया था. और फिर 10-15 मिनट तक उनकी तबियत से गांड मारने के बाद अब जब मेरा माल निकलने वाला था तो उन्होंने मेरे लंड को झट से अपने मुहँ में भर लिया था. और फिर मैंने भी वैसे ही उनके मुहँ में अपने लंड को भरकर आगे-पीछे करते हुए अपना सारा माल उनके मुहँ में ही निकाल दिया था. और फिर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर सो गये थे और फिर जब हम दोनों उठे तो हमने एक दूसरे को फिर से किस किया।

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!

Share.

Comments are closed.

error: