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दीदी की सील मेरे कुंवारे लंड ने तोड़ी

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प्रेषक :- कुमार…

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कुमार है और मेरी उम्र अभी 25 साल है और यह कहानी मेरे बचपन की कहानी है जो मैं आप सभी दोस्तों को सुनाने जा रहा हूँ और ये कहानी मेरी और मेरी मौसी की लड़की है जब मैंने उसके ही कहने पर उसकी चूत और मेरे लंड के टोपे की सील तोड़ी थी और दोस्तों उस चिकनी और टाइट चूत की चुदाई करके मुझे खूब मज़े भी आये थे जो की आप खुद ही पढ़कर मज़े लो।

बात उन दिनों की है जब मैं छुट्टियों के दिनों में मौसी के यहाँ जाता था हमारी मौसी के दो लड़कियां और दो लड़के है बड़ी लड़की का नाम है साक्षी और छोटी का नाम नम्रता था साक्षी दीदी की उम्र उस समय 18 साल थी और मेरी उम्र 12 साल थी। मौसी का घर बहुत बड़ा था, उस घर में 6 सदस्य रहते थे सबका अलग अलग कमरा था और आखिरी कमरा जिसमें कोई नहीं जाता था उस समय मुझे सेक्स के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था मैं दिन भर खेलता और रात को साक्षी दीदी के साथ सोता था हम दोनों एक ही चादर में सोते थे एक दिन दीदी ने मुझे रात को जगाया और नीचे जांघो के पास मेरा सर दबाकर चाटने को कहने लगी, जब मैंने नीचे देखा तो दीदी ने कुछ भी नहीं पहना था और उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा और थोड़ी देर बाद दीदी की चूत में से पानी निकलने लगा। मैंने वो पानी भी चाट लिया, फिर दीदी ने मुझे ऊपर खींचा और मेरे होठों को किस करने लगी फिर उसने मेरे लंड को पकड़ा और बोली  तुम्हारा लंड 7 इंच का कैसे हो गया।

तेरी उम्र तो 12 साल है और ये अभी 7 इंच का है बड़ा होकर ये तो पूरा 10 इंच का हो जाएगा, बाद में दीदी ने मेरा लंड मुहँ में लिया और चूसने लगी। वो उसे आगे पीछे कर रही थी उसने मेरे लंड को अपने मुहँ से पूरा गीला कर दिया था। फिर दीदी मेरे ऊपर आई और बोली मेरे ऊपर सो जा। मैं उसके पेट पर सो गया और उसने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और बोली अपनी कमर हिलाकर धक्के मार और दीदी मेरे होठों को किस करने लग गयी, मैंने जैसे ही पहला धक्का मारा तो मेरा 4 इंच लंड दीदी की चूत में चला गया और मेरी चींख निकलने ही वाली थी की उसने मेरे मुहँ में अपना मुहँ लगा दिया मेरी और दीदी की सील टूट चुकी थी। फिर उसने कहा धीरे-धीरे धक्के मारो लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा था मैंने दीदी से कहा मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन दीदी मानने वाली नहीं थी दीदी बोली पहली बार में दर्द होता ही है पर बाद में तुमको बहुत मज़ा आएगा, जल्दी-जल्दी धक्के मार नहीं तो मैं तुम्हें मारूँगी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैंने जैसे ही दूसरा धक्का मारा, मेरा 7 इंच लंड दीदी की चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया मेरे मुहँ से चींख निकलने ही वाली थी की दीदी ने मेरे और उसके मुहँ पर हाथ रख दिया। वो फिर बोली और ज़ोर से धक्का मार, तो मैंने और ज़ोर से धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और वैसे ही दीदी के पेट के ऊपर गिर पड़ा और दीदी भी वैसे ही लेटी रही। थोड़ी देर बाद दीदी ने बोला अब आराम से धक्के मार, और मैं धक्के मारता रहा, थोड़ी देर बाद दीदी झड़ गयी और बोली बस कर, लेकिन मुझे तो मज़ा आने लगा था तो मैंने दीदी को बोला थोड़ी देर रूको ना मुझे बहुत मज़ा आ रहा है मैं बहुत देर तक दीदी को ज़ोर-ज़ोर से चोदता रहा और फिर बहुत जोर से मेरे शरीर पर कपकपी हुई और मेरा माल दीदी की चूत के अंदर ही निकल गया। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी से बोला मुझे पेशाब आ रहा है दीदी बोली मेरे अंदर ही कर दो फिर मैंने दीदी की चूत के अंदर पेशाब करना चाहा तो अंदर पेशाब ही नहीं निकला फिर मैंने बोला दीदी अंदर तो मुझे पेशाब आ ही नहीं रहा फिर दीदी ने कहा मेरी चूत के ऊपर ही कर ले फिर मैंने दीदी की चूत के ऊपर ही पेशाब कर दिया और देखा तो दीदी की चूत में से खून और मेरा ऊपर से पेशाब टपक रहा था। फिर दीदी ने कपड़े पहन लिए और मेरा लंड और अपनी चूत कपड़े से साफ कर दी और फिर हम लोग सो गये। जब मैं सुबह उठा और पेशाब करने टॉयलेट में गया तो मुझे बहुत तकलीफ़ होने लगी मैंने दीदी से जाकर बोला मुझे पेशाब करने में बहुत तकलीफ़ हो रही है। तो दीदी बोली जल्दी से नहा धोकर तैयार हो जा, मैं जल्दी से तैयार हो गया और हम लोग क्लिनिक गये डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा दी और हम लोग घर पर वापस आ गये। और दवा खाने के बाद फिर मेरे पेशाब में तकलीफ़ नहीं हुई।

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!

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