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पति के दोस्त ने पढ़ लिया मेरी आँखो में हवस को

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प्रेषक :- नीलम…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम नीलम है वैसे तो मैं भी आप सभी लोगों की तरह ही कामलीला डॉट कॉम की एक बहुत बड़ी दीवानी हूँ। मैं इस वेबसाइट पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर खूब मजे करती हूँ और मैं हर दिन जब भी मुझको मौका मिलता है तो मैं कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने लगती हूँ। और मेरे ऐसा करने से मेरे मन को बहुत अजीब सी खुशी मिलती है और जब मेरे पास चुदाई करने का जुगाड़ नहीं होता तो मैं कामलीला डॉट कॉम की सेक्सी कहानियों को पढ़कर अपनी चूत में ऊँगली करके उसको शान्त करके खुशी महसूस करती हूँ। दोस्तों, मैं आपको पहले तो एक बार अपने बारे मैं बता दूँ. मैं एकदम गोरी-चिट्टी पंजाबी औरत हूँ और मेरा फिगर 34-30-36 का है. मेरी गांड पीछे से उभरी हुई है और हमारी सोसाइटी के सारे मर्द मेरे हुस्न के दीवाने है।

दोस्तों यह बात उस समय की है, जब सुनील (मेरे पति) ने अपने दोस्तों को घर पर खाने के लिए बुलाया था. सुनील का एक दोस्त था सुरेश. सुरेश हरियाणा का एक लम्बा चौड़ा गबरू जवान था. उसकी शादी होकर टूट चुकी थी. सुनील ने बताया था की उसकी बीवी उसको शादी के कुछ महीनें बाद ही छोड़कर अपने घर चली गई थी. सुनील के साथ शायद कुछ सेक्स सम्बधित समस्या थी. लेकिन सुरेश को देखकर तो मुझको ऐसा कुछ नहीं लगा था. जब वह हमारे घर पर आया था तो मैं बस उसको ही देखती ही रह गई थी. सुनील तो अच्छी कद-काठी वाला है और उनकी हाइट 5.9 फुट की है. लेकिन सुरेश उनसे भी ज्यादा फिट थे और लम्बे-चौड़े भी. मेरा सुरेश को इस तरह देखना शायद उनको अजीब लगा. लेकिन मेरी तरफ देखकर सुनील मुस्कुरा रहे थे. और फिर सुनील मेरे पास आए और मुझको छेड़ते हुए मुझसे बोले कि, इसका नम्बर भी लगाने का इरादा है क्या? तो फिर मैंने सुनील की तरफ देखा, तो मैंने उनके गाल पर प्यार से एक थप्पड़ मारा और फिर बोली कि, अभी तो नहीं लेकिन बाद का पता नहीं है. लेकिन सच मैं, मेरा दिल सुरेश की पर्सनॅलिटी पर फिसल चुका था. मैं पूरी पार्टी मैं उसे ही घूर रही थी और वह भी शायद मेरी हवस को समझ गया था. सुनील तो अपने दोस्तों के साथ व्यस्त थे और वह शराब भी काफी ज्यादा पी चुके थे. मेरा अब उस पार्टी में मन नहीं लग रहा था तो फिर मैं ऊपर अपने कमरे की तरफ जाने लग गई थी. और फिर सुरेश भी सबको छोड़कर और उनकी नजरों से बचकर मेरे पीछे-पीछे आ गया था और फिर वह भी मेरे कमरे में घुस गया था।

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मैंने कमरे का दरवाजा बन्द नहीं किया था. मैं कपड़े बदल रही थी. मैंने साड़ी उतारकर पलंग पर डाली हुई थी और उस समय मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट मैं ही थी. मुझको बहुत गर्मी लग रही थी तो मैंने अपने ब्लाउज के बटन खोल रखे थे. सुरेश बहुत आराम से मेरे कमरे में घुसा और फिर उसने बिना किसी आवाज के कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया था. और फिर वह मेरे पीछे आया और फिर उसने मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे पकड़ लिया था. उसने मुझको खुद से चिपका लिया था. और फिर मैंने उसको बिना देखे ही कहा कि, आप यहाँ क्यों आ गये? आपके दोस्त क्या बोलेंगे? उन सभी को छोड़कर आप अपनी बीवी के साथ कमरे में मस्ती कर रहे हो? वह एकदम चुप रहा और मैं उसके खड़े लंड का तनाव अपनी गांड पर महसूस कर रही थी. और फिर उन्होंने अपने होठों को मेरी गर्दन पर रख दिया था और उस समय मुझको कुछ अलग ही एहसास हुआ, तो मैंने उनको बोला कि, आज तो कुछ अलग ही लग रहा है तुम्हारा यह लंड लगता है यह पहले से मोटा हो गया है. फिर उनके चूसने से मैं और भी गरम होने लग गई थी. और फिर अचानक से कुछ मेरे दिमाग में आया और मैं एकदम से पलटी तो मैं एकदम से चौंक गई थी, क्योंकि मैं सुनील की नहीं बल्कि सुरेश की बाहों में थी. सुरेश उस समय केवल अंडरवियर में ही था. उनके लंड का उभार बहुत ज्यादा बड़ा था और उनकी झांटो के बाल उनकी मर्दानगी को बया कर रहे थे. मैं तो उनको देखकर एकदम से मदहोश सी हो गई थी लेकिन फिर एकदम से होश में भी आ गई थी. अब तक सुरेश मेरी आँखों में मेरी हवस को पढ़ चुके थे और उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेकर एकदम से दबा दिया और मेरा ब्लाउज निकाल दिया और ब्रा के हुक भी खोल दिए थे. और फिर मेरे 34 इंच के बब्स एकदम से बाहर आ गये थे. मुझको उस समय कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि सुरेश ने वह सब कुछ एकदम से किया था. मेरे कुछ सोचने से पहले ही, सुरेश ने अपने होठों को मेरे होठों पर रख दिया और फिर वह उनको मस्ती में चूमने लगे. उनके चूमने का अन्दाज़ बहुत ही कामुक था और मैं एकदम से गरम हो गई थी. और फिर उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपने अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया था।

बाप रे… क्या गरम लंड था. बहुत ही बड़ा और एकदम कड़क भी, और तब मुझको समझ में आ गया था कि, उनकी बीवी उनको छोड़कर क्यों चली गई थी. वह सेक्स की दीवानी नहीं होगी और सुरेश की जबरदस्ती नहीं सह पाई होगी. लेकिन उसमें उसकी कोई गलती नहीं थी क्योंकि सुरेश थे ही इतने सेक्सी. अब सुरेश ने एकदम से मुझे बिस्तर पर धक्का दिया और मेरे पेटीकोट को खींच दिया. और फिर उन्होंने अपने अंडरवियर को भी उतार दिया और फिर उनका बड़ा लंड मेरी आँखों के सामने झूलने लग गया था.  बाप रे.. कम से कम 7.5 इंच का तो होगा और 3 इंच मोटा भी होगा. वह एकदम सीधा था किसी रॉड की तरह. और फिर उन्होंने मेरी टाँगों को खींचा और मेरी टाँगों को फैला लिया और फिर अपनी जीभ को मेरी पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत के ऊपर रख दिया. बाप रे… क्या मस्त तरीके से चूम रहे थे वह मेरी चूत को और फिर एकदम से उसने अपनी एक ऊँगली मेरी पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत में डाल दी थी. और फिर मेरे मुहँ से एक जोरदार चीख निकली आहहह… मर… गईई… इस्सस…. और फिर उन्होंने एकदम से मेरी पैन्टी को भी खींच लिया था और मुझे पूरा नंगा कर दिया था. मेरी साफ और एकदम चिकनी गुलाबी चूत को देखकर उनके चेहरे की खुशी मुझे नजर आ गई थी. और फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत पर अपनी जीभ चला दी. उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी चूत को खोला और अपनी जीभ को मेरी चूत में एकदम अन्दर तक घुसा दिया था जिससे मैं तो एकदम से तड़प उठी थी और मेरे मुहँ से एक तेज सिसकी निकल पड़ी थी और फिर मैंने अपने हाथों से उसके बालों को पकड़कर खींच लिया था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैं तो जैसे अब मरने ही वाली थी. मैंने सुरेश से कहा कि, ऐसे और मत करो, डाल भी दो अब और नहीं सहा जा रहा. और फिर सुरेश उठे और अपने लंड को लेकर मेरी चूत पर घिसने लगे और घिसते-घिसते एकदम से उन्होंने अपने लंड को धक्का दे दिया. बाप रे… उनका लंड एकदम से तेजी से मेरी चूत को चीरकर मेरी बच्चेदानी से जा टकराया और मेरे मुहँ से आहहह… ओई माँ मर गई, निकला. लेकिन मैंने अपने हाथों से अपने मुहँ को बन्द कर लिया था। और सुरेश मुझको देखकर मुस्कुरा रहे थे और तेज़ी से धक्के मार रहे थे। और फिर मुझको तो पता नहीं क्या होने लगा था. मैं उस 15-20 मिनट की चुदाई के बीच कई बार झड़ चुकी थी और अब मैं उनके धक्के नहीं सह पा रही थी. और फिर सुरेश के धक्कों की स्पीड और भी तेज हो गई थी और फिर उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में ही उतार दिया था. उनका माल इतना सारा था कि, जैसे उन्होंने सालों से किसी चूत का स्वाद नहीं लिया हो और वह बहुत गरम भी था. और फिर उन्होंने एकदम से अपना लंड मेरी चूत से बाहर खींच लिया और मुझे बिस्तर पर नंगा ही छोड़कर बाथरूम में चले गये. और फिर वह अपने लंड को साफ करके बाहर आए और अपने कपड़े पहनकर नीचे चले गए थे।

और फिर मैं भी थोड़ी देर में उठी. लेकिन मुझे दर्द काफी हो रहा था. और फिर मैंने अपने कपड़े लिए और फिर मैं बाथरूम में नहाने के लिए चली गई थी. और फिर मैं भी थोड़ी देर में अपने कपड़े बदलकर नीचे आ गई थी और फिर मैंने देखा तो सुनील के सारे दोस्त जा चुके थे और वह सोफे पर सोए हुए थे. और फिर मैं उनको वहीं छोड़कर घर का मेन गेट बन्द करके वापस अपने कमरे में आ गई थी और सो गई थी. और फिर मैं सुबह उठी, तो मुझको बहुत अच्छा लग रहा था. उस रात सुनील का नशा कम हुआ तो वह भी उठकर कमरे में आ गया था और फिर मेरी सुनील से भी अच्छी चुदाई हुई थी. दोस्तों सुरेश से सेक्स का मौका मुझे फिर नहीं मिला. लेकिन आज भी मुझे जब भी सुरेश का लंड याद आता है तो मेरी चूत एकदम से गीली हो जाती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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