✽ रोजाना नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ ✽

बुआ की देसी गांड में निकाली मलाई  

0

प्रेषक :- गौरव…

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गौरव है और यह मेरी कामलीला डॉट कॉम पर आज पहली कहानी है और आप लोगों की तरह मैं भी कामलीला डॉट कॉम की हर कहानी को बड़ी रूचि से पढ़ता हूँ क्यूंकि ऐसा करने से मुझे बड़ा मज़ा आता है। दोस्तों शुरु से मुझे आंटी और शादीशुदा औरतें बहुत ही पसंद है। दोस्तों अब मैं, जो लोग आप मेरी इस कहानी को पहली बार पढ़ रहे है उनको मैं अपनी आज की कहानी को शुरू करने से पहले अपना परिचय दे देता हूँ।

दोस्तों यह कहानी मेरी बुआ की है जिनकी उम्र 38 साल की है, वो दिखने में तो ठीक-ठाक ही है लेकिन उनके बब्स और गांड एकदम कमाल के है। उनका फिगर 36-34-38 है और वो हॉस्पिटल में एक नर्स है। बुआ मुझे बचपन से ही अच्छी लगती है जब भी वो हमारे घर आती तो मैं मौका देखकर उनके साथ ही सो जाता था। और एक दिन मैंने हिम्मत करके नींद में सोई हुई बुआ के बब्स पर भी हाथ डाल दिया था, पर डर की वजह से मैं आगे नहीं बढ़ सका और फिर पेंट के ऊपर ही मूठ मारकर सो गया था। अब मैं कॉलेज में आ चुका था और इस फरवरी के महीने में मेरे ताऊजी को हॉस्पिटल में भरती करवाया गया था क्यूंकी उन्हें हार्ट का प्रॉब्लम था। फिर ताऊजी जी का ध्यान रखने के लिये मुझे रात को हॉस्पिटल में रुकना था, बुआ भी वही पर रुकी थी और वो हॉस्पिटल में एक नर्स की ड्रेस में ही थी। मैं बहुत खुश था की आज बुआ यही पर थी और वो भी अपने नर्स की ड्रेस में, उस सफ़ेद शर्ट में बुआ के बब्स एकदम टाइट थे और जब मैं बार-बार उन्हें देख रहा था तो बुआ का भी ध्यान मेरे ऊपर आया। मैंने और बुआ ने खाना साथ में ही खाया था तब ताऊजी सो रहे थे मैं और बुआ बातें कर रहे थे, मेरा ध्यान तो सच में बुआ के बड़े बब्स के ऊपर ही था। बुआ को भी अब पता चल चुका था की मैं उसके बड़े बब्स को ही देख रहा हूँ। रात के करीब 12 बज गये और हॉस्पिटल अब एकदम शांत हो चुका था, बुआ ने मुझसे कहा की…

बुआ :- गौरव चलो हम दोनों भी सो जाते हैं कमरे में एक ही सिंगल बेड है और तुम उसके ऊपर सो जाओ मैं नीचे सो जाती हूँ।

मैंने कहा, बुआ आप ऊपर सो जाओ तो उसने कहा चलो हम दोनों ही इस सिंगल बेड पर अड्जस्ट करके सो जाएँगे। मैं अंदर से बड़ा खुश हो रहा था की बुआ के साथ बहुत दिनों के बाद सोने को मिल रहा है। बुआ ने अब अपने नर्स की ड्रेस  को निकाल दिया, अब वो सलवार कमीज में थी और इस ड्रेस में भी उसके बब्स तो उतने ही हॉट लग रहे थे। फिर हम सोने लगे बुआ दीवार की साइड में थी और मैं उसके पीछे सोया हुआ था। फिर बुआ मेरी तरफ पलट गई और मेरे सामने अब उसके बब्स थे। उनको देखकर मेरे मुहँ में पानी आने लगा, आधे घंटे के बाद मुझे लगा की बुआ अब गहरी नींद में है तो मैंने हिम्मत करके धीरे से अपना हाथ पहले बुआ की गांड पर हल्के से लगाया, वो मेरे एकदम करीब थी और उसी वजह से मेरी हिम्मत खुली हुई थी। मैंने अपनी आँखे बंद कर रखी थी ताकि बुआ को शक ना हो। फिर मैंने धीरे-धीरे हिम्मत करके बुआ की कमीज़ को ऊपर किया और उसे कमर तक ला दिया। फिर मैंने उसके पैर के ऊपर हाथ रख दिया वो स्किन एकदम मुलायम थी जिससे मेरे लंड में गुदगुदी हो रही थी। अब मेरी उँगलियाँ आराम से बुआ की ब्रा पर चली गई, मेरा दिल और दिमाग़ दोनों आपे से बाहर हो गया था। फिर मैंने उनके बब्स तेज़ी से दबा दिए तो उनकी नींद खुल गई और वो मुझे बोली…

बुआ :- गौरव ये सब क्या कर रहे हो तुम?

मैं :- माफ करना बुआ, आप मेरे इतने पास थी इसलिए खुद पर कंट्रोल नहीं रहा।

बुआ :- तुम्हें शरम नहीं आती है ऐसा कहते हुए, तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो?

मैं :- बुआ मुझे आप बहुत पसंद हो और आपके इतने पास आने से मेरा कंट्रोल ही नहीं रहा खुद के ऊपर।

बुआ :- तुम्हें मुझमें ऐसा क्या अच्छा लगता है?

मैं :- बुआ सच कहु तो मुझे आपके बब्स और आपकी मोटी गांड बहुत ही पसंद है।

बुआ :- लेकिन गौरव ये सब ग़लत है।

मैं :- कुछ ग़लत नहीं है बुआ, सब को प्यार करने का और उसे पाने का हक तो है ना।

ये कहकर मैंने उन्हें किस कर दिया और उनकी कमर को सहलाने लगा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, ये देखकर मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखे बंद थी।  फिर मैंने उनके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया तो वो सामने से मुझे किस करने लगी करीब 10 मिनट तक हम एकदूसरे को किस करते रहे, और मैंने किस करते हुए उनके बड़े बब्स को भी अपने हाथ में लेकर दबाने लगा। फिर मैं उनकी गर्दन के ऊपर किस करने लगा, वो भी मदहोश हुई जा रही थी फिर मैंने उन्हें बेड पर सीधा लिटाया और उनकी कमीज़ को उतार दिया, अब वो बड़े बब्स मेरे एकदम सामने थे मैंने बब्स के बीच में मुहँ डाल दिया, क्या मस्त मुलायम बब्स थे बुआ के, फिर मैं एक हाथ से ही उनकी ब्रा की हुक को खोलने लगा और बुआ ने ब्रा को नीचे कर दिया अब मैं अपनी बुआ के निप्पल को मुहँ में लेकर चूसने लगा था। भूरे कलर के वो निप्पल करीब 2 इंच बड़े थे। अब बुआ ने मेरा सर पकड़कर अपने बब्स पर दबा दिया, साथ ही में उनके मुहँ से आहह… ओह… निकल रहा था। फिर बुआ ने कहा, गौरव आज तू मेरी मुनिया की सारी प्यास को बुझा दे! मैंने बब्स चूसते हुए ही बुआ की चूत पर हाथ रख दिया तो वो मचल सी गई। बुआ की चूत पर बाल नहीं थे, मैंने सलवार को भी नीचे कर दिया और फिर मैं अपनी बुआ की देसी चूत को चाटने लगा। क्या मस्त चूत थी उनकी, मैंने पूरी जुबान को अंदर कर दिया था और चूत के छेद को चाटकर साफ कर रहा था। बुआ मुझसे लिपटकर बोली, आई.लव.यू.गौरव, आज तुम मेरी सब ख्वाहिशो को पूरा कर दो। मैं ज़िंदगी में एक दमदार और मजबूत लंड और चिकने आदमी के साथ ही सेक्स करना चाहती थी।

मैं :- बुआ अब तो आपको रोज इस लंड का स्वाद मिलेगा मैं आपको खूब मज़े दूँगा, आपको अपनी रंडी बना के रोज चोदूंगा।

ये कहकर मैंने अपना लंड उनके मुहँ में दे दिया वो भी उसे पागलो की तरह चूसने लगी, बुआ सच में बहुत अच्छा लंड चूस रही थी। अब मैंने उन्हें सीधा लिटा दिया और उनकी टांगे अपने कंधे के ऊपर रख दी, चूत को जब मैंने लंड से एक झटके  में पेला तो बुआ मुझसे लिपट के कराह उठी। मेरा बड़ा लंड एक ही झटके में उसकी देसी चूत में घुस जो गया था, मैंने उसकी चिल्लाने की आवाज़ को दबाने के लिये उसके होठों का रसपान करने लगा। और फिर धीरे-धीरे से अपने लंड को बुआ की चूत से अंदर बाहर करने लगा। बुआ ने किस तोड़ी और बोली, गौरव आज मेरी प्यासी चूत की सब प्यास को मिटा दे बेटा। और इतना कहकर के वो मुझे गर्दन के ऊपर से चूसने लगी और उसने दोनों हाथों से मेरा सिर को पकड़ लिया और वो अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी थी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं बुआ की चूत में ही झड़ गया वो भी इस बीच में 2 बार झड़ चुकी थी। फिर मैं उनके साथ में ही लेट गया वो काफ़ी खुश थी मेरा लंड लेकर। उन्होंने मुझे किस किया और फिर उल्टी होकर लेट गई मैंने बुआ की कमर पर हाथ फेरा और फिर अपने हाथ बब्स के ऊपर रखकर के उन्हें दबाने लगा। अब मेरा सिकुड़ा हुआ लंड फिर से जान में आ रहा था, और मेरे हाथ भी अब बुआ की गांड पर थे।

बुआ :- गौरव अब क्या इरादा है तेरा?

मैं :- सोच रहा हूँ की आपकी गांड तो अभी कुंवारी ही होगी ना?

बुआ मेरी तरफ पलट गई और बोली, नहीं गौरव प्लीज़, पीछे बहुत दर्द होगा उसमें तो।

मैं :- मुझे यह अनुभव लेना है बुआ प्लीज़।

अब मैं उनके ऊपर आ गया और उनके होंठो को चूसने लगा वो भी गरम हो रही थी फिर मैंने उनकी गांड को खोलकर उसके छेद के ऊपर थूंक दिया. फिर चिपचिपे से छेद पर अपना लंड रखकर तोड़ा दबाया तो मेरा सूपड़ा अंदर घुसा। बुआ को सच में दर्द हुआ और उसने कराह दिया।

बुआ :- आअहह… गौरव प्लीज़ आराम से करो, ये मेरी गांड है कही ज़ोर से किया तो मैं सुबह चल भी नहीं पाऊँगी।

मैंने कहा, आराम से ही तो कर रहा हूँ। और मैंने एकदम आराम-आराम से लंड को अंदर धकेला और कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड बुआ की गांड में समा गया। बुआ ने भी अब कराहना बंद कर दिया था. मैंने लंड को बुआ की गांड में अंदर बाहर करना चालू कर दिया और कुछ ही मिनट की जबरदस्त धक्का-पेल चुदाई में अपनी मलाई को उनकी गांड में निकाल दिया।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

Comments are closed.

error: Content is protected !!