भाभी की चूत में लगाई लंड की चाबी  

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प्रेषक :- विशाल…

हाय फ्रेंड्स, कामलीला के मेरे प्यारे सेक्सी कहानियों के पाठकों, मैं आपका अपना विशाल बुरहानपुर से एक बार फिर से आपके लिए लेकर आया हूँ एक सच्ची सेक्स कहानी जिसे सुनकर आपका सब्र टूट जाएगा और आप अपने चूत और लंड से खेलने लगेंगे, मुझे पता है आप अभी सेक्स करने के लिए तड़प रहे है, और बहुत जोश चढ़ रहा होगा। दोस्तों मैं कामलीला का शुक्रगुज़ार हूँ जो उन्होंने मुझे अपनी कहानियों को आप सभी के साथ साझा करने का एक ऐसा मंच दिया है। पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता दूँ।

मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा हूँ, और इसी के सिलसिले में अभी मेरा तबादला बुरहानपुर में हुआ है मेरी उम्र 28 साल की है और मैं किसी भी लड़की को सन्तुष्ट करना अच्छी तरह से जानता हूँ. आज मैं आपको मेरे जीवन की एक और सेक्सी घटना सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी 6 महीने पहले की है, और यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त नवीन की पत्नी सुरभि की है, सुरभि एक बहुत ही खूबसूरत लड़की है, उसकी बॉडी का रंग गोरा है और बड़ी-बड़ी आँखे और गुलाबी होंठ जो कि किसी भी लड़के को घायल करने के लिए काफ़ी है, उनका फिगर 34-30-34 का है।

वो अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती है, योगा क्लास भी जाती है तो उनके  फिगर को देखते ही उसको चोदने का मन हो जाता है, मैं कई बार मेरे दोस्त के घर पर जाता था तो उनको देखते ही मेरे दिल के सारे तार खुल जाते थे। और मैंने यह बात भी नोट करी थी कि, वह भी मुझे देखते ही खुश हो जाती थी, मुझे लगता था कि, वह भी मुझसे चुदना चाहती थी, एक दिन मुझे नवीन का फोन आया और उसने मुझे अपने घर पर बुलाया. मैं 15-20 मिनट में उनके घर पर पहुँचा और फिर मैंने उनके दरवाजे की घन्टी बजाई तो सुरभि ने दरवाजा खोला और जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरा दिल तो बाग-बाग हो गया था, और फिर मैंने उनको बोला कि, भाभी नवीन कहा है तो उसने कहा कि, नवीन अभी-अभी उनके बॉस का फोन आया था तो बोलकर गये है कि, अभी आधे घन्टे में आ रहा हूँ। तो फिर उन्होंने मुझे अन्दर आने के लिए बोला, और फिर मैं अन्दर गया और उनके सोफे पर जाकर बैठ गया, सुरभि ने मुझे चाय लाकर दी और मैं उनके घर के हॉल में बैठकर के चाय पीने लगा. वो मुझे बैठने को बोल के नहाने चली गई थी. और जैसे ही वह जाने लगी तो, मैं उनकी उभरी हुई गांड को देखकर के सोचने लगा कि, यह एकबार चोदने के लिए मिल जाए तो मज़ा ही आ जाएगा. और तभी नवीन का फोन आया तो उसने बताया की उसे आने देर में लग जाएगी और उसने रात को मिलने के लिए बोला। मैं वहां से जाने ही वाला था की तभी सुरभि के गिरने की आवाज़ आई और मैं बाथरूम की ओर भागा और वहाँ पहुँचकर मैंने सुरभि से बोला कि, क्या हुआ सुरभि? तो उसने बोला कि, मेरा पैर फिसल गया है तो मैंने कहा कि, नवीन का फोन आया था उसको आने में देर लग जाएगी तो मैं जा रहा हूँ। तो उसने मुझे कहा थोड़ी देर बैठो, तो फिर मैं वहीं बाथरूम के बाहर ही खड़ा रहा. और फिर जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो मैं उसको देखते ही उसका दीवाना हो गया था. उसने अपने बदन पर सिर्फ़ टावल ही लपेटा हुआ था और वह लड़खडाते हुए चल रही थी तो मैंने उससे पूछा कि, मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दूँ? तो उसने कहा कि, मुझको मेरी कमर पर बहुत दर्द हो रहा है तो आप आइयोड़ेक्स लगा दो ना प्लीज।

तो मैंने बोला कि, ठीक है हाँ मैं लगा दूँगा. और फिर वह अपने बेडरूम में जाने लगी और उसने मुझको आइयोड़ेक्स लाकर दिया और फिर वह बेड पर उलटी होकर लेट गई थी. और फिर मैंने उसको उसके टावल को थोड़ा ऊपर लेने के लिए बोला. तो फिर जैसे ही उसने अपना टावल ऊपर किया तो मुझको उसकी काले रंग की पैन्टी दिख गई थी. और फिर उसकी गोरी-गोरी गांड को देखकर मेरा तो दिल एकदम से खुश हो गया था. और फिर मैं आइयोड़ेक्स को उसकी कमर पर लगाने लगा. और वह मेरे हाथ का नरमस्पर्श महसूस कर रही थी और मैं भी उसकी मखमली बॉडी को छूकर के मूड में आ गया था और मेरा लंड फड़फडाने लगा था. और तभी मैंने महसूस किया कि, मेरे लंड को कोई छू रहा है तो फिर मैंने देखा तो वह उसका पैर था, जो मेरे लंड को छू रहा था. और फिर मैं समझ गया था कि, यह सब तो बहाना ही है और बस वह तो मुझसे चुदवाना चाहती है. तो फिर मैंने उसकी पैन्टी उतारी और फिर मैं उसको अपने हाथ में लेकर सूँघने लगा, दोस्तों कसम से उसकी पैन्टी में से क्या कमाल की खुशबू आ रही थी कि, मुझको तो मज़ा ही आ गया था। और फिर मैं उसकी गांड पर अपना हाथ फेरने लग गया था. उसकी मुलायम गांड पर हाथ फेरने का मज़ा ही कुछ और था जो सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है।

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और फिर जब मैं उसकी गांड को अपने हाथ से दबाने लगा तो उसने भी अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और वह भी उसको ज़ोर-ज़ोर से दबाने लग गई थी. और फिर मैंने उसको सीधा किया और उसके बालों को कसके पकड़कर उसके होठों का रस पीने लगा, और उसके गुलाबी होठों को चूसने लगा और इस बीच मैंने उसका टावल पूरा ही निकाल दिया था. उसने ब्रा नहीं पहनी थी और फिर मैं उसके बब्स को भी दबाने लग गया था, तो वह लम्बी-लम्बी साँसे लेने लग गई थी और आहहह… आहहह… करके सिसकियाँ ले रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उसने मेरी पैंट को खोला और मेरे अंडरवियर को निकालकर के मेरे लंड को वह आगे-पीछे करने लग गई थी. और मैंने भी जोश ही जोश में उसके बब्स को मसल-मसल के लाल कर दिया था और फिर मैं उसकी एकदम साफ़-सुथरी चूत को रगड़ रहा था, उसकी चिकनी चूत बहुत ही कमाल की लग रही थी, और फिर मैंने उसको बेड के पास नीचे उसके घुटनों पर बैठाया और मैं बेड पर बैठ गया था और उसको मैंने मेरा लंड चूसने के लिए दे दिया था. और फिर एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर वह पहले धीरे-धीरे मेरे लंड को किस करने और फिर जैसे-जैसे वह गरम होने लगी तो मेरा पूरा लंड चूसने लगी तो, मैंने भी उसके बालों को पकड़ा और उसके मुहँ को आगे-पीछे करने लगा।

और फिर करीब 5-7 मिनट के बाद वह खड़ी हुई और फिर उसने मुझको धक्का देकर के बेड पर लेटा दिया और फिर उसने मेरे ऊपर आकर अपनी चूत को मेरे मुहँ पर सेट कर दिया था और हम दोनों ही फिर 69 की पोजीशन में आ गए थे. और इस पोजीशन में हम दोनों ने एकदूसरे के अंगों को पूरे 15 मिनट तक चाटा और चूसा था और फिर वह मुझसे कहने लग गई थी कि, विशाल मेरी जान अब मुझको और ज्यादा मत तड़पाओ और मेरी इस प्यासी चूत की प्यास को अपने लंड से बुझा दो. और फिर उसने उठकर मेरे ऊपर आकर अपनी रसीली चिकनी चूत को मेरे लंड पर सेट किया. और फिर वह मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी, और मैं भी उसके बब्स को दबाने लगा और फिर उसने धीर-धीरे मेरे आधे लंड को अपनी चूत में डाल दिया था और फिर वह ऊपर-नीचे होने लग गई थी. और फिर मैंने नीचे से एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था और जिससे वह भी चीखने लग गई थी तो मैं भी रूक गया था. और फिर कुछ देर के बाद वह धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और फिर जैसे ही उसका दर्द कम हुआ तो वह फिर से मेरे लंड पर ज़ोर-ज़ोर से उछलने लग गई थी. और वह खुद ही जोर-जोर से चीखने भी लग गई थी और उसकी चीख पूरे घर में गूँज रही थी।

और फिर करीब 10-15 मिनट के बाद वह नीचे उतरी तो फिर मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से आकर उसकी चूत में अपना लंड डालकर उसको चोदने लगा. मेरा लंड उसकी चूत को अन्दर तक चीर रहा था दोस्तों कसम से उस समय तो क्या मज़ा आ रह था, उसकी चूत की चुदाई करके, मैं आपको बता ही नहीं सकता. और वह भी मेरी चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी. और उसकी चूत से पानी निकलकर बह रहा था जिससे मेरा लंड भी पूरा गीला हो चुका था और जिससे वह उसकी चूत में फका-फक जा रह था. मेरे हर धक्के पर उसकी खुशी साफ झलक रही थी। और फिर इस बीच वह 2 बार झड़ चुकी थी और वह मुझसे बोले जा रही थी वाह! विशाल, तुम तो कमाल की चुदाई करते हो मेरा पति तो जल्दी ही ठण्डा पड़ जाता है। और मेरी प्यासी चूत को जी भरके लंड भी नहीं मिल पाता है, प्लीज आज तुम मेरी प्यास को बुझा दो. मैं कब से तुम्हारा लंड लेने को बेताब हूँ। चोदो और जोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को आहहह… ऊइईई… मर गई आहहह…

अब मेरी बारी थी तो मैंने उससे कहा कि, सुरभि मेरी जान मेरा निकलने वाला है और अब बताओ कि, कहाँ छोड़ना है? तो उसने मुझको बोला कि, अन्दर तो बिलकुल भी मत छोड़ना. तो फिर मैंने उसको सीधा किया और उसको फिर से उसके घुटनों पर बैठाया और उसको अपना लंड पकड़ा दिया. और फिर वह अपने एक हाथ से मेरे लंड को आगे-पीछे कर रही थी और एक हाथ से अपने बब्स को  भी मसल रही थी और बीच-बीच में कभी-कभी मेरे लंड को अपने मुहँ में लेकर भी चूस रही थी. और तभी एक ज़ोर की पिचकारी की तरह मेरा पानी निकला और उसने उसके मुहँ को पूरा भर दिया था और उसने मेरा सारा पानी पी लिया था, और फिर उसने मेरे लंड को चाट-चाटकर के अच्छी तरह से साफ भी कर दिया था. और फिर हम दोनों बेड पर एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गये थे। और फिर उस दिन हमने एक बार और भी सेक्स किया था और उसने मुझको और मैंने उसको जबरदस्त मज़ा दिया था। और अब तो दोस्तों जब भी हमको मौका मिलता है तो हम उसको नहीं छोड़ते है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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