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मामा की साली की जबरदस्त वाली चुदाई

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प्रेषक :- रोहित…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम रोहित है, मेरी उम्र अभी 26 साल की है. और मैं सहारनपुर का रहने वाला हूँ. दोस्तो आज जो सेक्सी चुदाई की कहानी मैं आप सभी को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से बताने जा रहा हूँ, वह मेरी सबसे प्यारी मामी की बहिन मतलब कि, मेरे मामा की साली की चुदाई की है. दोस्तों यह बात आज से 3 साल पहले की है जब मैं अपने मामा की साली पर फिदा था, मेरा उसके साथ हल्का-फुल्का मजाक़ और छेड़खानी तो चलती ही रहती थी, लेकिन मैंने कभी भी यह नहीं सोचा था कि, हम एक दिन सेक्स भी करेंगे।

दोस्तों यह सब हुआ कुछ इस तरह से कि, मैं एकबार अपने मामा जी से मिलने उनके घर गया हुआ था तो अगले ही दिन वहाँ पर मेरी मामी की छोटी बहिन शिवानी भी आ गई थी, उनसे मिलने के लिये क्यूंकी उसके भी कॉलेज की छुट्टियाँ थी कुछ दिनों के लिए. वह एक सीधी-साधी लड़की है जो कि, कॉलेज में पढ़ती है. दोस्तों उसका रंग गोरा है, भरा हुआ गदराया बदन है, रसीले होंठ है, लम्बा ऊँचा कद है, उसके बब्स तो ऐसे है कि, जैसे वह अभी उसके कपड़े फाड़कर बाहर निकल पड़ेंगे. दोस्तों पर वह बातें बहुत करती है और उसकी आवाज भी बहुत प्यारी है, मन तो करता है कि, बस उसके साथ बैठे हुए बातें ही करते रहो और उसकी सुरीली हँसी सुनते रहो. दोस्तों हमारे बीच कुछ ना कुछ तो सुलग ही रहा था जो आग बनकर बाहर निकलने वाला था. मैं चोरी-चुपके से उसकी कलाई पकड़ लेता था तो कभी उसको आँख मार देता था, और कभी हवा में ही किस दे देता था।

और वह भी जवाब में कभी मेरा साथ देती तो कभी डर के मारे मुझे आँख दिखा देती थी, और हम दोनों बस उन खूबसूरत पलों को ऐसे ही जी रहे थे. दोस्तों मैंने उसके साथ उसका हाथ देखकर भविष्य बताने के बहाने से बहुत बार उसको छुआ भी था और उसके हाथ पर किस भी किया था. और जब मैं उसके बब्स की तरफ निहारता तो वह शरमा जाती थी. दोस्तों एकबार तो मैंने उसको उसकी ब्रा का साइज़ भी पूछा था, जो उसने कई दिनों तक मुझको नहीं बताया था. लेकिन एक दिन जब मामी बाथरूम में नहाने गई थी और मामाजी ऑफीस गये हुए थे तो मैंने उसको पकड़ लिया था और फिर उसके कुर्ते के पीछे के हुक को खोलकर उसकी ब्रा का साइज़ जो उस पर छपा हुआ था उसको देख ही लिया था. और उस समय वह मुझपर गुस्सा दिखाने लग गई थी. और उसी समय मैंने उसकी मुलायम पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया था जिसके कारण वह कुछ-कुछ गरम सी होने लग गई थी, और वह अपनी आँखें बंद करके मेरी उस हरकत का मजा लेने लग गई थी। और फिर मैं अपना हाथ उसकी ब्रा के अन्दर ले गया था और बड़े ही प्यार से मैं उसके बड़े-बड़े बब्स को दबाने लग गया था, और साथ ही साथ उसकी कोमल पीठ को अपनी जीभ से चाटने भी लग गया था. और उस समय एक मदहोशी छाई हुई थी हम दोनों पर. और हम दोनों ही सुलग रहे थे और इन्तजार में थे कि, कब मौका मिले और हम दोनों इस सब्र के बाँध को तोड़कर कामलीला की नदी में डुबकियाँ लगायें।

और फिर मैं उसको सहलाते और छूते-चूमते हुए उसके गालों तक पहुँचा ही था कि, तभी बाथरूम की कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई, इसका मतलब कि, मेरी मामी नहाकर बाहर आ रही थी. और फिर हम दोनों जल्दी से एक दूसरे से अलग हुए और मैं उस कमरे में से बाहर जाकर सामने खुले गार्डन में धूप सेकने बैठ गया था. और शिवानी भी खुद को संभालती हुई किसी किताब के पेज पलट रही थी. वह पानी से गीली उसकी चूत और मैं अपने तने हुए खड़े लंड को सहलाते हुए अपनी आग को दबाकर एक दूसरे को निहार रहे थे. और तभी मैंने उसको दिखाते हुए हल्के से अपनी पेन्ट की चेन को नीचे किया तो उसने भी मेरी तरफ आँख मारते हुए अपने रसीले होठों पर अपने गुलाबी जीभ को मादक अंदाज में घुमाया. दोस्तों उस समय उसका ऐसा इशारा देखकर तो ऐसी आग लग रही थी कि, सब कुछ नजर-अंदाज करते हुए उसको अपनी बाहों में भर लूँ और उसकी ज़बरदस्त चुदाई कर दूँ, और तब तक करता रहूँ जब तक कि, वह चीख ना पड़े. और उसके उस इशारे के साथ ही मैंने भी अपनी जीभ से उसकी चूत की तरफ चाटने का इशारा कर दिया था. और फिर उसने शरमाकर उस किताब में अपना चेहरा छुपा लिया था. और मेरी मामी हमारी इन सब हरकतों से बेख़बर होकर अपने काम में लगी हुई थी. और फिर वह तैयार होकर पास ही के एक मन्दिर में जाने लगी तो, मैंने भी उनसे कहा कि, मामी चलो मैं भी चलता हूँ तुम्हारे साथ. तब मामी ने एकबार अपनी बहिन की तरफ देखा और फिर मुस्कुराकर मुझको उनके साथ जाने से मना कर दिया था. और फिर तो मैंने भी सोचा कि, चलो यह तो अच्छा मौका है शिवानी के साथ मस्ती करने का. और फिर मामी चली गई थी।

और फिर मैं झट से कमरे में घुसा और शिवानी की तरफ लपका, और वह मुझसे बचकर भागती हुई कभी सोफे पर चढ़ जाती तो कभी बेड पर, और तभी मैंने अपने एक हाथ से उसकी टाँग को पकड़कर उसको बेड पर गिरा दिया था और फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया था. मैं उसको पूरी तरह से अपनी गिरफ़्त में लेकर चूमने और चाटने लग गया था, और फिर मैंने उसकी चुनरी को उससे अलग करके फेंक दिया था. और फिर मैंने उसके सूट के हुक खोल दिए थे और इसबार तो मैंने उसकी ब्रा के हुक भी खोल दिए थे, और अब उसकी पीठ जो एकदम मुलायम थी वह मुझको बुला रही थी कि, मैं उसको चूमते चाटते हुए खा ही जाऊँ. उसकी ब्रा को खोलने की वजह से अब उसके बब्स को पकड़ना और भी आसान हो गया था. और फिर मैं उसके बब्स के निप्पल को पकड़कर छेड़ रहा था और वह आहहह… उफ्फ्फ… इस्सस… की मादक सी आवाज़ें निकाल रही थी. और साथ ही साथ मैंने अब उसको सीधा लेटा लिया था और उसको अपने नीचे दबाकर उसके रसीले होठों की तरफ बढ़ा था, आग तो उसमें भी पूरी थी और उसने झट से मेरे सिर को पकड़कर मेरे होठों को अपने होठों से चिपका लिया था. और फिर हम दोनों एकदूसरे में खो से गये थे, मैंने उसके होठों पर पहले अपनी जीभ घुमाई और फिर उसके ऊपर वाले होंठ को चूसने लगा. और फिर लगभग 5 मिनट के बाद मैंने उसके नीचे वाले होंठ को अपने होठों में दबाकर चूसना और चाटना चालू किया तो वह सिसकियाँ ले लेकर मज़ा ले रही थी. और वह मुझको और भी उत्तेजित कर रही थी. उसने भी इस किस में मेरा पूरा सहयोग दिया था. दोस्तों असली मज़ा भी तभी आता है जब सेक्स में दोनों ही एक दूजे का बराबर सहयोग करें और एकदूसरे को पूरे आनन्द का अनुभव करायें. और फिर मैंने उसकी आँखों को चूमा, और फिर गोरे और मुलायम गालों को और फिर उसकी गर्दन, और फिर उसके दोनों बब्स के बीच की गहराई को. दोस्तों उस पल तो मुझको इतना सुख मिल रहा था की मन कर रहा था कि, यह पल यहीं थम जाए।

और फिर मुझको समझ में ही नहीं आ रहा था कि, आगे बढूँ या फिर यहीं रुककर यही सब करता रहूँ. और इसी के साथ शिवानी की मदहोश कर देने वाली आवाजें आहहह… इस्सस… उफ्फ्फ… छोड़ो मुझे. सच में उस समय वह मज़ा अपने चरम पर था और हम दोनों एकदूसरे पर खुद को रगड़ रहे थे, मसल रहे थे और बेड के एक कौने से दूसरे कौने तक खुद को रोल करते हुए चूम रहे थे. दोस्तों सच में सेक्स में जो मज़ा है वह दुनिया की किसी भी दूसरी चीज़ में नहीं है. बस आपको इसका भरपूर मजा लेना आना चाहिए. अभी तक तो हम अपने कपड़ों में ही थे और कपड़ों के ऊपर से ही एकदूसरे को छूते और चूमते हुए मज़ा ले रहे थे. और फिर मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ाया और उसने भी मेरे लंड को मेरी पेन्ट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया था. और फिर मैंने उसको कहा।

मैं :- शिवानी, यार तुमने तो मेरे अन्दर एक अजीब सी आग लगा दी है, और मुझको तुम बहुत मज़ा दे रही हो. तो फिर अब आगे का क्या इरादा है बढ़ें आगे?

शिवानी :- हाँ मेरे यार, जो भी करना है करो अब तो मुझसे भी सहा नहीं जाता, बहुत गीली हो रही हूँ मैं तो आहहह…

मैं :- चलो तो हो जाओ तैयार आज तुमको मैं जन्नत दिखाता हूँ।

शिवानी :- ओह मेरे प्यारे राजा बस अब हो जाओ शुरू और चढ़ जाओ मेरे ऊपर।

और फिर मैंने शिवानी को उठाया और उसके कुर्ते को उसके शरीर से निकालकर अलग कर दिया था, हाय! क्या बताऊँ दोस्तों वह क्या नज़ारा था मामा की साली के बब्स ब्रा में से आज़ाद होकर मेरे सामने तने हुए खड़े थे. और उसके दोनों बब्स के बीच की गहराई मुझको बुला रही थी. और मैं तो जोश में पहले से ही था वह नज़ारा देखकर. और फिर मैंने शिवानी को फिर से बेड पर लिटाया और फिर मैं उसके दोनों बब्स के बीच की गहराई वाली जगह को चूमता चाटता हुआ आगे बढ़ा. और फिर मैंने उसके बब्स के निप्पल को भी चूसना शुरू कर दिया था. मैं एक बब्स को तो मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को अपने हाथ से दबा रहा था. और शिवानी भी मेरे बालों में अपनी ऊँगलियाँ घुमा रही थी और उफ्फ्फ… आहहह… इस्सस… की आवाज़ें भी निकाल रही थी।

और उस समय मुझको जो अहसास हो रहा था उसको तो इस समय केवल महसूस ही किया जा सकता है, उसको बयान करना बहुत मुश्किल है. उसके बब्स के निप्पल के बाद मैंने उसके गोरे चिकने पेट को पहले तो खूब सहलाया और फिर मैंने उसको चूमा और फिर चूसा और फिर चाटा, कसम से क्या मज़ा आ रहा था. आहहह… और फिर मैंने उसकी नाभि में जीभ घुसाई तो वह एकदम से उछल पड़ी थी, और मेरे ऐसा करने से उसने अपनी कमर ऐसे उठा ली जैसे वह अपनी बॉडी से धनुष बना रही हो. उसको शायद उस समय गुदगुदी हो रही थी, और उसपर सेक्स की मादकता भी छा रही थी।

और फिर मैंने आगे बढ़ते हुए अपने दाँतों से मेरे मामा की साली की सलवार का नाडा खोल दिया था, और फिर मैंने उसकी सलवार को भी उसकी टाँगों से जुदा कर दिया था. उसकी मखमली टाँगें जो बहुत चिकनी थी, अब वह मेरे सामने थी. और फिर मैंने अपनी जीभ से उनको भी काफ़ी देर तक चाटा था और कई बार उन पर जगह-जगह दाँत से भी काटा था. और वह मेरी इस हरक़त से जोर से चीख पड़ी थी, और ऊहहह… उफ्फ्फ… की आवाज़ें निकालती हुई उछल-उछलकर मज़ा ले रही थी. और फिर इतने फोरप्ले के बाद तो मेरे लिये मेरे लंड को संभालना बहुत ही मुश्किल था. तो फिर मैंने भी झट से अपने सारे कपड़े उतार फैंके थे, और मैंने अपने लंड को आज़ाद कर दिया था. और फिर वह होने वाली लंड-चूत की लड़ाई के लिये तनकर खड़ा था. और वह शिवानी को सलामी दे रहा था, और उसको देखकर शिवानी की आँखों में भी चमक आ गई थी।

शिवानी :- हाय! यह क्या चीज़ है यार एकदम मस्त, कितना टाइट है और गरम भी है, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा डार्लिंग।

मैं :- ‘डार्लिंग’ मतलब कि, डाल लिंग?

शिवानी :- हट बदमाश क्या मतलब निकाला है तुमने डार्लिंग का, तुम्हारी इन्हीं अदाओं पर तो हम तुमपे मरते हैं हाय सेक्सी।

और फिर इतना कहकर उसने मेरे लंड को अपने नरम हाथों में थाम लिया था, और फिर वह उसको अपने गुलाबी होठों पर रगड़ने लग गई थी. और उस पल मैं तो जैसे किसी जन्नत में था, बहुत मज़ा आ रहा था, और फिर उसने मेरे लंड की चमड़ी को थोड़ा आगे-पीछे किया और फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया था. ऐसा अहसास तो बड़ा ही ग़ज़ब का होता है, उस समय तो इतना मज़ा आ रहा था कि, क्या बताऊं, मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था. और अब मुझको मामा की साली की चूत चाहिए थी।

मैं :- जान अब तो चूत के दर्शन करवा दो, अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा है।

शिवानी :- ठीक गुरु तो हो जा शुरू… जी ले अपनी ज़िंदगी और मार ले बिल्ली।

उसकी इन बातों को सुनकर तो मेरा जोश और बढ़ गया था और फिर मैंने उसको सीधा लिटाया उसकी टाँगों को फैलाया और उसकी पैन्टी के ऊपर से ही मैंने उसकी चूत में ऊँगली घुसा दी थी तो वह चहक पड़ी थी आहहह… उफ़फ्फ़… क्या कर दिया है तुमने यह मुझको तो करंट सा लग गया जानू उइइइ… और फिर मैंने उसकी पैन्टी उतार दी थी जो काफ़ी गीली हो चुकी थी. दोस्तों उसकी चूत की महक बड़ी ही मादक थी. और फिर मैंने उसकी गोरी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को छेड़ना शुरू किया, और उसमें अपनी 3 ऊँगलियाँ घुसा दी और फिर मैं उनको ज़ोर-जोर से अंदर–बाहर करने लग गया था. और जिससे वह भी सिसकारियाँ भरने लग गई थी, चिल्लाने लग गई थी और कहने लग गई थी कि, प्लीज डार्लिंग रुक जाओ मुझको गुदगुदी हो रही है, मैं मर जाऊँगी. मुझे अब ऊँगली से नहीं अपने उस मोटे मूसल जैसे लंड से चोदो प्लीज. और फिर मैंने उसके होठों को अपने होठों में दबाते हुए अपने नंगे बदन को उसके नंगे बदन के ऊपर चढ़ाते हुए उसको अपने नीचे दबा लिया था. हमारे नंगे बदन जब एक दूजे से चिपकते हैं तो हमारे बदन की गरमी और उत्तेजना दोनों ही बढ़ जाती थी. और फिर मैंने अपने लंड को पकड़कर उसकी चूत के छेद पर रखा और अपनी आँखों से उसको इशारा करके उससे पूछा कि, क्या वह तैयार है, और फिर उसका इशारा मिलते ही मैंने एक झटका दिया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत के अन्दर घुस गया था और वह चीख पड़ी थी ऊईईई… मर गई….है.

शिवानी :- रोहित तुमने तो मुझको चीर कर रख दिया है, मैं तो मर गई… मुझको तो मिर्ची लग रही है, आहहह… उफ्फ्फ… इस्सस…

मैं :- अभी सब ठीक हो जाएगा, और थोड़ी देर बाद के बाद तुम किसी जन्नत में होगी जान।

और फिर मैंने उसकी गर्दन को किस करते हुए उसके बब्स को भी दबाया और चूसा भी, और फिर अब वह कुछ अच्छा महसूस कर रही थी. और फिर मैंने आगे बढ़ने के लिए अपने लंड को बाहर खींचा और एकबार फिर से धक्का मारा जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक समा गया था. और उसने मेरे दोनों होठों को ज़ोर से अपने होठों में भर लिया था और वह ऊन्न्नह… आहहह… मर गई… इस तरह की आवाज़ें निकालने लग गई थी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर जब वह कुछ शांत हुई तो फिर तो मेरा भी रुकना मुश्किल ही था, तो मैंने अब उसकी ज़बरदस्त चुदाई शुरू कर दी थी, अन्दर-बाहर, इकसठ-बांसठ करते हुए मेरा लंड उसकी चिकनी चूत के अन्दर फिसल रहा था और उस पल तो ऐसा लग रहा था कि, जैसे मेरा लंड किसी जन्नत की सैर कर रहा है. सच में दोस्तों चूत से अच्छी जगह और कोई भी नहीं है इस धरती पर. मैं उसकी गरम और चिकनी चूत में धक्के पे धक्का लगा रहा था. और वह भी अपनी टाँगें और अपना पिछवाड़ा उठा-उठाकर मेरे धक्के पर धक्के से ही जवाब दे रही थी।

शिवानी :- ओह रोहित सच में मैं तो किसी जन्नत में ही हूँ इतना मज़ा आ रहा है मुझको कि, मैं बता ही नहीं सकती हूँ. तुम बहुत अच्छे हो बस तुम तो ऐसे ही लगे रहो मेरी जान. मेरी चूत के मालिक चढ़े रहो. और फिर इतना कहकर वह झड़ गई थी. और फिर मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने भी 8-10 तेज-तेज धक्के और मारे और फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खीँच लिया था. और फिर मैंने अपना सारा माल उसकी चूत के ऊपर ही झाड़ दिया था. दोस्तों कसम से उस समय मुझको बहुत शान्ती मिली थी. और फिर मैं अपने लंड को झाड़ते हुए उसके ऊपर ही लेट गया था और वह भी मेरी पीठ पर अपना हाथ फेरने लग गई थी, और मैं उसको चूमता रहा।

और फिर 10 मिनट के बाद हम दोनों ने उठकर खुद को साफ़ किया और फिर हम दोनों ही अपने-अपने कपड़े पहनकर टी.वी. देखने लग गए थे. और फिर कुछ ही देर में मामी भी मंदिर से आ गई थी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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