मामा ने खोली मेरी माँ की चूत की खिड़की

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प्रेषक :- चेतन…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम चेतन है और मैं नज़फगढ़ का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 19 साल की है. मेरा रंग गोरा है और मैं जवान हूँ, मेरा शरीर भरा हुआ है और मेरे सीने पर हल्के से बाल भी है। दोस्तों यह कहानी आज से 2 साल पुरानी है जब मैंने स्कूल की पढ़ाई खत्म कर ली थी. गर्मी की छुट्टियां चल रही थी और मैं कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए अब बस रिज़ल्ट आने का इन्तजार कर रहा था. हाँ तो दोस्तों चलो अब मैं कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों गर्मी की छुट्टियों में अक्सर मेरे मामा हमारे घर पर आते है. मुझे अपने ममेरे भाई लोगों के साथ खेलने में मज़ा भी आता है. पर उस बार मामा अकेले ही आए थे. और फिर मैंने उनके साथ दोपहर का खाना खा लिया और फिर मैं टीवी देखने बैठ गया था. और मामा भी आराम करने के लिये अन्दर के कमरे में चले गये थे. और फिर मेरी माँ भी कुछ देर में उस कमरे में चली गई थी. वह सब तो मेरे लिए सामान्य सा था. क्योंकि मामा और मेरी माँ अक्सर बैठकर अपने घर और रिश्तेदारों के बारे में बात करते रहते थे. जो मुझे अच्छा नहीं लगता था. और उस दिन भी मुझे लगा कि, आज भी वह दोनों ऐसे ही कुछ बातें करने बैठे होगें, इसीलिए मैंने अनदेखा कर दिया. और मैंने बिलकुल भी सोचा नहीं था कि, यह दिन मेरी जिन्दगी ही बदल देगा।

टी.वी. देखते-देखते मुझको प्यास लगी और जब मैं पानी पीने के लिए उठकर जा रहा था, और फिर मैंने सोचा कि, शरबत बना दूँ. और इसलिये मैं मामा को शरबत के लिए पूछने उनके कमरे की और चल दिया था. कमरे का दरवाज़ा उस समय अन्दर से बन्द था जो मुझे थोड़ा अजीब लगा. और कमरे के अन्दर से बातों की आवाज़ भी नहीं आ रही थी. तो फिर मैंने दरवाज़े के छेद में से जब अन्दर देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गये थे. दोस्तों अन्दर मैंने वह देखा जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, और वह सब मेरी आँखों के सामने हो रहा था. और उस नजारे को देखकर एक आम 19 साल के जवान लड़के की तरह मैं भी उत्तेजित हो रहा था और साथ मुझको घिन भी आ रही थी. पर मैं उनको बिना परेशान किए ही दरवाज़े के होल में से वह सब देखता रहा. मेरे मामा अपनी पेन्ट और अंडरवियर को घुटनों तक सरकाकर पलंग पर लेटे हुए थे, और मेरी माँ उनके एक साइड में बैठकर उनका लंड अपने मुहँ में लेकर चूस रही थी।

और मामा भी अपनी आँख बन्द करके मज़े ले रहे थे. उनका एक हाथ माँ के बालों को पकड़े हुए था तो दूसरा हाथ माँ के बब्स को मसल रहा था. दोनों एक दूसरे का साथ दे रहे थे और उनको देखकर तो ऐसा लग रहा था कि, मानों यह सब वह दोनों हमेशा से करते आ रहे है. माँ मामा का 7” का मोटा लंड अपने मुहँ में लेकर बड़े ही प्यार से चूस रही थी. और फिर माँ को बीच में रोककर मामा ने उनको उनकी साड़ी उतारने को बोला. माँ उनको मना कर रही थी. शायद मैं घर में हूँ इसीलिए वो मना कर रही थी. और फिर मामा भी मान गये थे. पर उन्होंने माँ की साड़ी को ऊपर कर दिया था. और फिर मामा ने माँ की पैन्टी उतारकर के माँ को बेड पर लेटाया. क्या नज़ारा था दोस्तों उसको देखकर तो मेरा भी लंड मेरी पेन्ट के अन्दर से कड़क हो चुका था।

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और फिर मैंने देखा कि, जहाँ से मैं इस दुनिया में आया था वो चूत एकदम चिकनी और बिना बालों वाली थी. और फिर मेरे मामा झुके और उन्होनें अपना मुहँ माँ की चूत से सटा दिया. मुझको ज़्यादा कुछ तो दिखा तो नहीं लेकिन मुझको यह तो अन्दाजा लग ही रहा था कि, शायद मामा माँ की चूत को चाट रहे थे और काट भी रहे थे. क्यूँकी माँ बहुत तड़प रही थी. और लम्बी-लम्बी सिसकियाँ ले रही थी, पर उन्होनें मामा को रोका नहीं था. और इसी बीच एक मौका ऐसा भी आया जब माँ ने मामा के सिर को पकड़कर अपनी चूत की तरफ खींचा. और फिर मुझको लगा की जैसे माँ झड़ने वाली हो. और फिर कुछ देर के लिए माँ ऐसे ही रही. और फिर मामा थोड़े ऊपर सरके और माँ के होठों पर उन्होनें एक हल्का सा किस दिया. और फिर माँ उनके कान में कुछ बोली तो मामा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी. मामा का लंड खड़ा तो था ही. और फिर उन्होंने अपने लंड के टोपे की खाल को पीछे किया और अपना मोटा लंड सीधा माँ की चूत पर टिकाया. और फिर धीरे से एक धक्का मारा और फिर उनका लंड बड़ी ही आसानी से माँ की चूत के अन्दर पच की आवाज़ के साथ चला गया. गर्मी के दिनों वाली दोपहर का समय और ऊपर से हवस में डूबे यह दोनों उनके जिस्म तो बिना कपड़ों के भी पसीने से भीग गये थे. माँ और मामा दोनों ही अब अपनी चुदाई की परम सीमा में थे. माँ बेड पर ही लेटी हुई थी और वह खुद ही अपने बब्स को मसल रही थी. माँ की चूत पलंग के कौने पर थी और मामा खड़े रहके उनको चोद रहे थे. माँ का बदन एक उस समय बहुत ही मस्त लग रहा था बड़े-बड़े बब्स, मोटी गांड. तो दूसरी तरफ मामा का जिस्म एकदम कसा हुआ था. उनका बड़ा लंड माँ की चूत में पूरा अन्दर तक जा रहा था. मामा ने भी फिर माँ को बड़ी ही बेरहमी से चोदना शुरू कर दिया था. धक्कों के बाद धक्के और उनकी चुदाई से निकलती हुई पच-पच की आवाज़ मुझ तक पहुँच रही थी. और फिर मामा ने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी थी, और अब शायद वह भी झड़ने वाले थे।

और फिर जैसे ही उनका पानी निकलने लगा तो उन्होंने अपना लंड माँ की चूत से बाहर निकाल दिया और अपना सारा पानी माँ के पेट पर गिरा दिया था. और फिर मामा माँ के बाजू में ही बेड पर ढेर हो गये थे. माँ की हवस अभी मिटी नहीं थी शायद. इसलिये वह मामा को किस करने लगी तो मामा ने दूसरी तरफ मुहँ फेर लिया था और उठकर के अंडरवियर से अपना लंड साफ कर लिया और उन्होनें अपनी पेन्ट पहन ली थी. और फिर माँ भी उनकी चुदाई से खुल चुकी साड़ी पहनने लग गई थी. और फिर मामा को दरवाजे की तरफ आते देख मैं वहाँ से किचन की और भाग गया. और शरबत बनाने में जुट गया. और फिर कुछ देर के बाद माँ भी किचन में आई और वह मुझसे बोली कि, तेरे मामा के लिए भी बना दे।

और फिर मेरे मामा अगले दिन सुबह उनके घर चले गए थे और आगे के दो-तीन दिन माँ मेरे साथ ऐसे बर्ताव कर रही थी कि, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. हाँ वह भी तो सच ही है ना, क्योंकि मैंने उनके हिसाब से ना कुछ देखा और ना ही कुछ सुना था. उनकी वह कामलीला केवल उस कमरे की उन चार दीवारों को ही पता थी. पर मेरे अन्दर का मर्द भी अब जाग चुका था. और मेरे मन में ढेरों सवाल उठ रहे थे कि, माँ और मामा यह सब कब से और क्यूँ कर रहे थे? क्या पापा माँ को सन्तुष्ट नहीं कर पाते थे? और क्या मुझे पापा को यह सब बता देना चाहिए या सीधा माँ और मामा को ही जाकर यह सब बंद करने को बोल दूँ?

प्लीज़ आप भी मुझको कोई सुझाव दो।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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