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मामी की बहन की जी ली ज़िंदगी मार ली बिल्ली

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प्रेषक :- राज…

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। दोस्तों मैं भी आप सभी की तरह कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पिछले एक साल से पढ़ रहा हूँ और मुझे ऐसा करने में बड़ी खुशी मिलती है। दोस्तों मेरी लम्बाई 5.7 है, मेरा बदन गठीला, रंग गोरा है और मेरी उम्र 24 साल है और रही मेरे लंड की बात तो वो लम्बाई में सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है। दोस्तों अब मैं आप सभी का ज़्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी की तरफ आता हूँ जिसके लिए आज मैं यहाँ पर आया हूँ।

दोस्तों बात उन दिनों की है जब मैं अपने मामा की साली पर फिदा था मेरा उसके साथ हल्का फूलका मजाक चलता रहता था लेकिन मैंने कभी ये नहीं सोचा था की हम एक दिन सेक्स के मज़े भी लेंगे, हुआ कुछ यूँ की मैं मामा जी से मिलने उनके घर गया हुआ था तो अगले दिन वहाँ मामी की छोटी बहन रिया भी आ गयी थी उनसे मिलने क्यूंकी उसके कॉलेज की छुट्टियां थी कुछ दिनों के लिए, वो दिखने में एकदम मस्त माल है जो कॉलेज में पढ़ती है, रंग गोरा है भरा हुआ गदराया बदन है, गुलाब के जैसे खिले हुए होंठ, लम्बा ऊँचा कद हाइट, बूब्स तो ऐसे जैसे अभी सीना फाड़कर बाहर निकल पड़ेंगे, बातें बहुत करती थी और उसकी आवाज भी काफ़ी सुरीली थी, मन करता था की बस उसके साथ बैठे हुए बातें करते रहो और उसकी सुरीली आवाज को सुनते रहो। हमारे बीच कुछ ना कुछ तो सुलग रहा था जो आग बनकर निकलने वाला था, मैं चोरी छुपके से उसकी कलाई पकड़ लेता, कभी उसको आँख मारता तो कभी फ्लाइयिंग किस देता, वो भी कभी उनका मुस्कुराकर जवाब देती तो कभी डराकर मुझे आँखें दिखाती, हम दोनों बस मज़े कर रहे थे फिर मैंने उसके साथ उसका हाथ देखकर उसका जीवनकाल बताने के बहाने से काफ़ी समय से उसको टच किया और उसके हाथ पर किस भी किया जब मैं उसके बूब्स को निहारता तो वो शरमा जाती, मैंने उसको उसकी ब्रा का साइज़ भी पूछा, जो उसने कई दिनों तक मुझे नहीं बताया था लेकिन एक दिन जब मामी बाथरूम में नहाने गयी और मामाजी ऑफीस गये तो मैंने उसको पकड़ लिया और उसके कुर्ते के पीछे के हुक खोलकर उसकी ब्रा का साइज़ जो उस पर लिखा था उसको देख लिया जिससे वो मुझपर गुस्सा दिखाने लगी। उसी समय मैंने उसकी मुलायम पीठ पर हाथ फैरना शुरू कर दिया जिस कारण वो गरम होने लगी और अपनी आँखें बंद करके मज़ा लेने लगी, मैं अपना हाथ उसकी ब्रा के अंदर ले गया और बड़े प्यार से उसके भरे हुए बूब्स को दबाने लगा, साथ ही साथ उसकी कोमल मुलायम पीठ की स्किन को अपनी जीभ से चाटने भी लगा, दोस्तों एक मदहोशी थी हम दोनों के बीच, हम दोनों ही सुलग रहे थे और इंतज़ार में थे की कब मौका हाथ लगे और सब्र के बाँध को तोड़कर कामलीला की नदी में डुबकियाँ लगायें, मैं उसको सहलाते और चाटते, चूमते हुए उसके गालों तक पहुँचा ही था की तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई, मतलब मामी नाहकर बाहर आ रही थी हम दोनों जल्दी से एक दुसरे से अलग हुए और मैं अपने कमरे से बाहर जाकर सामने खुले होल में धूप सेकने बैठ गया रिया भी खुद को संभालती हुई किसी अखबार के पेज को पलटती रही, वो गीली चूत और मैं अपने तने हुए खड़े लंड को सहलाते हुए हम दोनों अपनी आग को दबाकर एक दूसरे को निहार रहे थे।

तभी मैंने हल्के से अपनी पेंट की चैन को नीचे किया तो उसने भी मेरी तरफ आँख मारते हुए अपने रसीले होठों पर अपनी गुलाबी जीभ को मादक अंदाज़ में घुमाया ऐसा आकर्षण देखकर ऐसी आग लग रही थी की सब कुछ इग्नोर करते हुए उसको बाँहों में भरकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई करूँ, और तब तक करूँ जब तक वो चींख ना पड़े, उसके इस आकर्षण के साथ ही मैंने भी अपनी जीभ से उसकी चूत की तरफ चाटने का इशारा कर दिया और उसने शरमाकर अखबार में अपना चेहरा छिपा लिया। मामी इन सब बातों से बेख़बर थी और अपने काम में लगी रही और फिर तैयार होकर पास ही एक मंदिर था वहाँ जाने लगी, तभी मैंने उनसे कहा मामी चलो मैं भी चलता हूँ तुम्हारे साथ तब मामी ने एक बार अपनी बहन की तरफ देखा और फिर मुस्कुराकर मुझे मना कर दिया मैंने भी सोचा चलो अच्छा मौका है रिया के साथ मस्ती करने का, फिर मामी चली गयी मैं झट से कमरे में घुसा और रिया की तरफ लपका, वो मुझसे बचकर भागती हुई कभी सोफे पर चढ़ जाती तो कभी बेड पर, तभी मैंने एक हाथ से उसकी टाँग को पकड़कर उसको बेड पर गिरा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसको पूरी तरह अपनी गिरफ़्त में लेकर चूमने और चाटने लगा, मैंने उसके शरीर से उसकी चुन्नी को अलग कर दिया और उसके सूट के हुक खोल दिए और इस बार उसकी ब्रा के पीछे के बटन भी खोल दिये, अब उसकी पीठ जो एकदम मुलायम थी वो मुझे न्यौता दे रही थी की मैं उसको चूमते चाटते हुए खा ही जाऊं। उसकी ब्रा खोलने की वजह से अब उसके बूब्स को पकड़ना और भी आसान हो गया था, मैं उसके निप्पल को पकड़कर छेड़ रहा था और वो ओह्फ्फ… उफ़फ्फ़… आईईइ… ऊऊहह… की आवाज़ें निकाल रही थी। साथ ही साथ मैंने अब उसको सीधा लिटा दिया था और उसको अपने नीचे दबाकर उसके रसीले होठों की तरफ बढ़ने लगा, आग तो उसमें भी पूरी थी उसने झट से मेरे सर को पकड़कर मेरे होठों को अपने होठों से चिपका लिया और फिर हम दोनों एक दुसरे में खो गये, मैंने उसके होठों पर पहले अपनी जीभ घुमाई फिर उसके होंठ को चूसने लगा, लगभग 10 मिनट के बाद मैंने उसके निकले होंठ के पानी को होठों में दबाकर चूसना और चाटना शुरु किया वो सिसकियाँ ले लेकर मज़ा ले रही थी और मुझे गरम कर रही थी उसने भी इस पल में पूरा सहयोग दिया। दोस्तों असली मज़ा भी तभी आता है जब सेक्स में दोनों ही पार्ट्नर एकदुसरे का साथ दे और आनंद का अनुभव करायें। दोस्तों यह सेक्स स्टोरी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने उसकी आँखों को चूमा उफ, इतना प्यार मिल रहा था की मन कर रहा था की ये पल कभी खत्म ही ना हो मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था की आगे बढू या फिर इसी तरह चूमता और चूसता रहूँ और इसके साथ साथ रिया की मदहोश आवाजें ऊऊओ…. ऊहह… फक मी, चोदो मुझे, हम दोनों एक दूसरे पर खुद को रगड़ रहे थे, मसल रहे थे और बेड के एक कोने से दूसरे तक खुद को रोल करते हुए एकदूसरे से लिपट रहे थे, दोस्तों सच में सेक्स में जो मज़ा है वो दुनिया में किसी और चीज़ में नहीं इसको एंजाय करना आना चाहिए बस, अभी हम कपड़ों में ही थे और कपड़ों के ऊपर से ही टच करते हुए मज़ा ले रहे थे, मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूत की तरफ बढाया और उसने मेरे लंड को पेंट के ऊपर से ही सहलाना शुरु कर दिया अब मैंने उसको कहा रिया मज़ा आ रहा है ना?

रिया :- अरे यार तुमने तो आग लगा दी है, जबरदस्त मज़ा दे रहे हो तुम।

मैं :- तो अब आगे का क्या इरादा है, बढ़ें आगे?

रिया :- मेरे यार जो करना है करो अब सहा नहीं जाता, बहुत गीली हो रही हूँ।

मैं :- चलो तो हो जाओ तैयार, आज तुम्हें मैं जन्नत दिखाता हूँ।

रिया :- ओहह… मेरे स्वीटी पिए जाओ बस,

अब मैंने रिया को उठाया और उसका कुर्ता उसकी शरीर से निकालकर अलग कर दिया, हाईइ… क्या बताऊं यारों क्या नज़ारा था उसके बूब्स ब्रा में से आज़ाद होकर सामने तने हुए खड़े थे, मैं तो जोश में था ही ये नज़ारा देखकर मैंने रिया को फिर बेड पर लिटाया और मैंने उसके निप्पल को चूसना शुरू किया, एक को मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को हाथ से दबा रहा था रिया मेरे बालों में उंगलियाँ घुमा रही थी और आऐईइ…  फक मी… की आवाज़ें निकाल रही थी। जो समा बंधा था इसको बयान करना कुछ मुश्किल है, निप्पल के बाद मैंने उसके गोरे चिकने पेट को पहले तो खूब सहलाया फिर मैंने उसको चूमा और चूसा फिर चाटा, क्या मज़ा आ रहा था आहहा… मैंने उसकी नाभि में जीभ घुसा दी तो वो उच्छल पड़ी, उसने अपनी कमर उचका ली, उसको गुदगुदी हो रही थी और सेक्स की मादकता भी चढ़ रही थी अब मैंने आगे बढ़ते हुए अपने दाँतों से उसकी सलवार का नाडा खोल दिया और उसकी दोनों टाँगों को एकदूसरे के करीब कर दिया, उसकी मखमली टाँगें जो एकदम गोरी चिकनी मेरे सामने थी, मैं जीभ से उनको काफ़ी देर चाटता और कई बार जगह जगह दाँत से काटा भी, वो मेरी इस हरक़त से चींख पड़ी और ऊओ… आआहह… उउईइमा… की आवाज़ें निकालती हुई उच्छल उच्छलकर मज़ा ले रही थी अब इतने गरम होने के बाद लंड को संभालना मुश्किल था। मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके और लंड को आज़ाद कर दिया वो टंकार खड़ा था और रिया को सलामी दे रहा था, उसको देखकर रिया की आँखों में चमक सी आ गई।

रिया :- हाय क्या चीज़ है यार एकदम मस्त, कितना टाइट है और गरम भी वाउ मज़ा आएगा डार्लिंग आज तो।

मैं :- डार्लिंग मतलब लिंग डालूं।

रिया :- हट बदमाश क्या मतलब निकाला है डार्लिंग का इन्हीं अदाओं पर तो हम तुमपर मरते है सेक्सी।

इतना कहकर उसने लंड को अपने हाथों में थाम लिया और उसको अपने गुलाबी होठों पर रगड़ने लगी, मैं तो जैसे जन्नत में था, क्या मज़ा आ रहा था, फिर उसने लंड के टोपे को आगे पीछे किया और लंड को मुँह में ले लिया, ऐसी फीलिंग तो ग़ज़ब की होती है, इतना मज़ा आ रहा था की क्या बताऊं, मेरा लंड एकदम  टाइट हो चुका था और अब उसको चूत चाहिए थी।

मैं :- जान अब चूत के दर्शन करा दो, अब सब्र नहीं हो रहा।

रिया :- हाँ गुरु हो जा शुरू, जी ले अपनी ज़िंदगी मार ले बिल्ली।

उसकी इन बातों को सुनकर तो मेरा जोश और बढ़ गया, मैंने उसको सीधा लिटाया उसकी टाँगों को फैलाया और पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत में उंगली घुसा दी वो चींख पड़ी उउंम्म… उफ़फ्फ़… क्या कर दिया है करंट लगेगा जानू… फिर मैंने उसकी पेंटी उतार दी जो काफ़ी गीली हो चुकी थी, उसकी महक बड़ी मादक थी फिर मैंने उसकी साफ़ बालों वाली चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को चोदना शुरू किया, उसमें तीन उंगलियाँ घुसा दी और उन्हें ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा वो सिसकारियाँ भरने लगी, चिल्लाने लगी प्लीज डार्लिंग रुक जाओ गुदगुदी हो रही है मैं मर जाऊँगी, मुझे अब उंगली से नहीं उस मोटे लंड से चोदो ना प्लीज, मैंने उसके होठों को अपने होठों में दबाते हुए अपने नंगे बदन को उसके नंगे बदन के ऊपर चढ़ाते हुए उसको अपने नीचे दबा लिया, नंगे बदन जब एकदुसरे से चिपकते है तो बदन की आग और बढ़ जाती है फिर मैंने अपने लंड को पकड़कर उसकी चूत के ऊपर रखा और आँखों से उसको सिग्नल दिया वो तैयार ही थी, उसका इशारा मिलते ही मैंने एक झटका दिया तो आधा लंड अंदर घुस गया वो चींख पड़ी ऊओहमा…. मर गयी, मार डाला… उउईइ… माँ और उसकी चूत की सील टूट चुकी थी।

रिया :- तुमने तो मुझे चीर के रख दिया है मैं तो मर गयी बहुत मिर्ची लग रही है।

मैं :- जान अभी ठीक हो जाएगा।

अब मैंने उसकी नाक को किस करते हुए उसके बूब्स को दबाया और चूसने शुरु कर दिया, फिर मैंने आगे बढ़ने के लिए लंड को बाहर खींचा जिससे उसकी चूत की टूटी हुई सील का खून मेरे लंड पर लगा था और एक बार फिर से धक्का मारा जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक समा गया, उसने मेरे दोनों होठों को ज़ोर से अपने होठों में भर लिया और आअहह.. एम्म… मर गयी इस तरह की आवाज़ें निकालने लगी। अब जब वो कुछ शांत हुई फिर तो रुकना मुश्किल ही था, मैंने ज़बरदस्त चुदाई शुरू की अंदर बाहर, लंड चिकनी चूत के अंदर फिसल रहा था ऐसा लग रहा था जैसे लंड जन्नत की सैर कर रहा है सच में चूत से सही जगह कोई नहीं है लंड के लिए, उसकी गरम और चिकनी चूत में धक्के पर धक्का लगा रहा था मैं, और वो अपनी टाँगें और पिछवाडा उठा उठाकर मेरे धक्के का धक्के से जवाब दे रही थी क्या बताऊँ दोस्तों कितना मज़ा आ रहा है मैं बयान नहीं कर सकता और बोल रही थी लगे रहो मेरी जान मेरी चूत के देवता चढ़े रहो लव.यू. आहह… मज़ा आ रहा है इतना कहकर वो झड़ चुकी थी। मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने दो तीन धक्के और मारकर लंड को बाहर खींच लिया और फिर सारा पानी उसकी चूत के ऊपर ही झाड़ दिया। मैं लंड को झाड़ते हुए उसके ऊपर ही लेट गया और वो मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगी, मैं उसको चूमता रहा।

धन्यवाद कामलीला डॉट कामे के प्यारे पाठकों !!

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