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मेमसाहब के साथ मालिश के बहाने से खेला आर-पार का खेल

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प्रेषक :- अजय…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम अजय है, मैं मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 28 साल की है. मैं एक अच्छा दिखने वाला 5.8 फुट का लड़का हूँ. दोस्तों मैं पिछले कुछ समय से कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने लगा हूँ और धीरे-धीरे मुझको इस वेबसाइट की सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगने लगी है। मैंने इस वेबसाइट पर बहुत सारी कहानियाँ पढ़कर उनके पूरे-पूरे मजे लिए जिसकी वजह से मुझे सेक्स करना भी बहुत अच्छा लगने लगा है। दोस्तों मेरे साथ आज से 2 साल पहले एक बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी हादसा हुआ था. और अब मैं उस हादसे को एक कहानी का रूप देकर आप सभी के लिये कामलीला डॉट कॉम वेबसाइट के माध्यम से लेकर आया हूँ। हाँ तो दोस्तों अब मैं आपका ज्यादा समय ना लेते हुए सीधे मेरी उस कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों मुझे घर का काम करना, खाना बनाना बहुत अच्छा लगता है. मैं 10वीं क्लास तक पढ़ा लिखा हूँ और इसीलिए मुझको थोड़ी बहुत इंग्लीश भी आती है. एक बार मैं मुम्बई में काम की तलाश में गया था लेकिन वहाँ पर मुझको कोई काम नहीं मिला था और वक़्त यूँ ही गुजर गया, और फिर एक दिन एक दुकानदार ने मुझे देखा और पूछा क्या करते हो? तो मैंने उससे कहा कि, कुछ नहीं, काम की तलाश कर रहा हूँ. तो उस दुकानदार ने मुझसे कहा कि, मुझे भी एक अच्छा सा लड़का चाहिए दुकान और घर पर काम करने के लिए. तो फिर मैं राजी हो गया था. लेकिन दोस्तों वहाँ पर तनख्वाह सिर्फ 3,500 रूपये और खाना-पीना और रहना साथ में था।

और फिर मैं रोज उनकी दुकान पर काम करता था, मुझे सिर्फ दोपहर को समय मिलता था एक घन्टे का आराम करने और खाना खाने के लिए. दोस्तों उस दुकानदार के घर पर उनका एक एक बेटा और एक बेटी थी और उसकी पत्नी भी बहुत ही सुन्दर थी. वह मुझको उनके घर के सदस्य की तरह ही मानती थी. मैं दुकान के अलावा रोज उनके घर का काम भी करता था जैसे कपड़े धोना, झाड़ू लगाना, पोछा-बर्तन और कभी-कभी खाना भी बनाता था. मेमसाहब मुझसे बहुत खुश थी. और फिर कुछ महीनों के बाद, एक दिन दोपहर को जब मैं दुकान से उनके घर पर खाना खाने गया तो मैंने वहाँ पर पहुँचकर देखा कि, मेमसाहब दर्द से कराह रही थी. और फिर मैंने उनसे पूछा कि, क्या हुआ मैमसाहब? तो उन्होंने मुझसे कहा कि, मेरे पैरों मैं बहुत दर्द हो रहा है, बेटा और बेटी भी दोनों ही कॉलेज गये हुए है, और अब मैं क्या करूं? तो फिर मैंने उनको कहा कि मेमसाहब, मैं साहब को अभी दुकान से बुलाकर लाता हूँ. तो मेमसाहब ने मुझको कहा कि, तुम साहब से बात करके क्या करोगे? वह तो दुकान पर है और वह तो शाम को ही आएँगे. तो फिर मैंने उनको कहा कि, तो फिर मेमसाहब क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ? तो मेमसाहब ने मुझको कहा कि, ठीक है तुम थोड़ा सा मेरे पैरों को दबा दो. और फिर मैं मेमसाहब के पैर दबाने लगा. अब तो मेमसाहब रोज दोपहर को मुझसे अपने पैर दबवाने लग गई थी. रविवार के दिन मेरे सेठजी की दुकान बन्द रहती थी. और इसी तरह एक रविवार को घर पर कोई भी नहीं था, घर पर सिर्फ मैं और मेमसाहब ही थे. मैं सुबह से शाम तक घर पर ही रहता था, क्योंकि बाहर जाना मना था।

उस दिन ऐसा हुआ जिससे मेरी जिन्दगी ही बदल गई. रोज की तरह मेमसाहब ने मुझसे अपने पैर दबाने को कहा तो मैं मेमसाहब के पैर दबा रहा था कि, उसी समय मेमसाहब ने मुझसे कहा कि, अजय मेरी कमर को भी थोड़ा दबा दो. और फिर मैंने वैसा ही किया. दोस्तों मेमसाहब का बदन बहुत ही खूबसूरत था. उनकी कमर दबाते समय कभी-कभी गलती से मेरे हाथ उनके कूल्हों को भी छू जाते थे. ऐसा करने से मुझको थोड़ा-थोड़ा जोश चढ़ने लग गया था पर मुझको डर भी लग रहा था. और फिर मेमसाहब ने मुझसे कहा कि, अजय तुम बहुत अच्छे लड़के हो और बहुत काम भी करते हो और मेरे पैर भी दबाते हो इसलिए तुम हमारे घर को छोड़कर कभी मत जाना. और फिर मेमसाहब सो गई. और फिर मैं भी अपने कमरे में जाकर सो गया था. और फिर शाम को घर के सभी लोगों को किसी पार्टी में जाना था पर मेमसाहब उस पार्टी में नहीं गई थी. उस दिन मैंने ही खाना पकाया था और फिर रात को जब सोने का समय आया तो मेमसाहब ने मुझे बुलाया और कहा अजय क्या तुम मेरे थोड़ी देर पैर दबा दोगे? तो मैंने उनको कहा कि, क्यूँ नहीं मेमसाहब. और फिर मैं अपनी मेमसाहब के पैर दबाने लग गया था. मेमसाहब ने उस समय नाइटी पहन रखी थी. वह उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी. और फिर करीब 15-20 मिनट के बाद मेमसाहब ने मुझसे कहा कि, मेरी पीठ और कमर भी दबा दो. तो मैंने उनको कहा कि, ठीक है।

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और फिर जब मैं मेमसाहब की कमर को दबा रहा था तो फिर से मेरा हाथ बार-बार उनके कूल्हों को छू रहा था, और ऐसा करने में मुझको बहुत मजा आ रहा था. उस समय मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने मेमसाहब को देखा तो वह सो गई थी. दोस्तों अब मुझसे तो बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था तो अब मैं जानबूझकर उनकी गांड को दबा रहा था. पर उन्होंने मुझको कुछ भी नहीं कहा था तो फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी. और फिर मैं मेमसाहब की एक साइड से उनकी कमर को दबाते समय साइड से उनके बब्स को भी छू लेता था. कसम से उस समय मुझको बहुत मजा आ रहा था. अब मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई थी. और फिर मैंने सोचा कि, क्यों ना मेमसाहब को भी धीर-धीरे जोश में लाया जाए इसीलिए मैं मेमसाहब की नाइटी के अन्दर हाथ डालकर उनकी मालिश करने लग गया था. और फिर 10 मिनट के बाद मेमसाहब ने मुझसे कहा कि अजय लगता है तुमको नींद नहीं रही है जाओ और चुप-चाप सो जाओ. तो मैंने उनको कहा कि, ठीक है. और फिर करीब रात को 11 बजे सब लोग पार्टी से वापस आ गये थे. और फिर अगले दिन दोपहर को मेमसाहब का साहब के पास फोन आया और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, तुम्हारी मेमसाहब की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए तुम घर जाओ और मेमसाहब का ख्याल रखो और घर का बाकी काम भी कर देना. और फिर मैं घर पर चला गया. और जब मैं घर पर पहुँचा तो मैंने देखा कि, मेमसाहब बिस्तर पर लेटी हुई थी। और फिर मैंने उनसे पूछा कि, क्या हुआ? तो फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर गई थी तो मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा है इसलिए तुम मेरी तेल से मालिश कर दो. तो फिर मैं जल्दी से किचन से सरसों का तेल ले आया. और मेमसाहब की मालिश करने लगा. उन्होंने नाइटी पहनी हुई थी. तो फिर मैंने उनके पैर और कमर की मालिश करी और फिर जब मैंने उनकी पीठ की मालिश तो मुझको पता चला कि, मेमसाहब ने ब्रा और पैन्टी नहीं पहनी थी. उनका नरम और गरम बदन मुझको जला रहा था और उस समय मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था. बीच-बीच में कभी-कभी मेरा लंड उनके शरीर से छू जाता था. और फिर उस दिन मैंने सोच लिया था कि, आज तो आर या पार का खेल खेलना ही है. और फिर धीरे-धीरे मैं मेमसाहब के बब्स के निप्पल को चूमने लगा और उस समय उनकी आँखें बन्द थी लेकिन फिर भी मेमसाहब ने मुझको कुछ भी नहीं कहा तो मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई थी. लेकिन उस समय उनकी बेटी कॉलेज से वापस आ गई थी. और फिर मैं मेमसाहब के कपड़े ठीक करके उनकी बेटी के लिये दरवाजा खोलकर दुकान पर चला गया था।

और फिर एक दिन ऐसा हुआ कि, रात में घर पर कोई नहीं था साहब और उनके बेटा-बेटी किसी शादी में गए हुए थे और घर पर सिर्फ मैं और मेमसाहब ही थे और उस दिन बारिश भी बहुत हो रही थी और ठंड भी बहुत थी. खाना खाने और किचन का काम खत्म करने के बाद मैंने मेमसाहब से पूछा कि, मैं आपकी मालिश कर दूँ तो मेमसाहब ने कहा नहीं बहुत ठण्ड है, बारिश भी बहुत तेज हो रही है और बादल भी गरज रहे है इसलिए मुझको बहुत डर लग रहा है. अजय, आज तुम मेरे कमरे में यहाँ नीचे बिस्तर लगाकर सो जाओ. तो फिर मैं उनके कमरे में ही सो गया था और फिर करीब एक घंटे के बाद जब मेरी नींद खुली तो बारिश भी बन्द हो चुकी थी और फिर मैंने उठकर के लाइट जला दी और फिर ए.सी. को चालू कर दिया।

और फिर जब मेरी नजर मेमसाहब पर पड़ी तो मेरी आखें फटी की फटी ही रह गई थी. उस समय मेमसाहब की नाइटी एकदम ऊपर हो रही थी और उनकी चूत मुझको एकदम साफ-साफ नजर आ रही थी. उनकी चूत एकदम साफ और बिना बालों वाली थी और लगता था कि, उन्होंने अपनी चूत के बाल आज ही साफ किए थे. दोस्तों उस समय उस नजारे को देखकर मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था. और मैं फिर से लाइट बन्द करके मेमसाहब के बगल में जाकर सो गया था. और फिर मैं धीरे-धीरे मेमसाहब के बदन को सहलाने लगा. और फिर कुछ देर के बाद मेमसाहब ने करवट बदल ली और उस समय उनकी पीठ मेरी तरफ थी. और फिर मैंने अपने एक हाथ से अपना अंडरवियर निकाल दिया और फिर मैंने अपने लंड को मेमसाहब की गांड की दरार में फँसा दिया था. दोस्तों कसम से क्या मस्त गांड थी उनकी, एकदम मक्खन जैसी मुलायम. उस समय मेरे लंड से थोड़ा-थोड़ा पानी निकलने लग गया था जिसके कारण मेरा लंड अब उनकी गांड की दरार में फिसल रहा था. और फिर मैंने धीरे से अपना एक पैर मेमसाहब के पैर के ऊपर रख दिया और मेरा एक हाथ उनकी कमर पर था और फिर मैंने अपने लंड को उनकी गांड की दरार में अन्दर तक दबा दिया था और फिर मेरा लंड फिसलकर उनकी चूत में और अन्दर तक चला गया था. और फिर मुझको महसूस होने लगा कि, मेमसाहब की चूत भी गीली हो गई है. और फिर मैंने एक धक्का थोड़ा तेज दिया तो मेरा लंड अब मेमसाहब की चूत के अन्दर तक पूरा का पूरा ही चला गया था. दोस्तों कसम से उस समय मुझको तो बहुत मजा आ रहा था अफ क्या गरम चूत थी उनकी। और फिर मैं वैसे ही धीरे-धीरे मेमसाहब को चोदने लगा. और फिर करीब पाँच मिनट के बाद मेरे लंड ने अपना पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया था और फिर मैं वापस आकर अपने बिस्तर पर सो गया।

और फिर अगले दिन दोपहर में फिर से मेमसाहब का पैर दर्द कर रहा था तो उनकी मालिश कर रहा था. और इसी बीच मेमसाहब की आँख लग गई थी और मैं फिर से मेमसाहब को इधर-उधर छूने लग गया था. और फिर मेमसाहब ने करवट बदली और फिर मैंने मेमसाहब की साड़ी उठाकर उनकी गांड के पीछे से अपना लंड लगाकर उनको चोदने लग गया था। दोस्तों फिर अचानक से मेमसाहब की आँखे खुल गई थी तो मैं एकदम से डर गया था, लेकिन उन्होंने तो उलटा मुझको यह कहा कि, कितने दीनों से तू मुझको तडपा रहा है. कल रात को भी तुमने मुझको चोदा तो मुझे मजा नहीं आया और अब तुम मुझको रोज चोदना. और फिर मैं उनकी चूत को चाटने लगा और फिर 10 मिनट तक मैंने उनकी चूत की चटाई करी तो उनकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया था. उनकी चूत के नमकीन पानी को मैंने चाट-चाटकर उनकी चूत को एकदम साफ कर दिया था. और फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिये थे और फिर वह मेरे लंड को चाटने और चूसने लग गई थी. और फिर हम दोनों एक-दूसरे को किस करते हुए बहुत गरम हो चुके थे और वह आहह… इस्सस… करके सिसकारी भरने लग गई थी और साथ ही वह यह भी कह रही थी कि, अब और मत ताड़पाओ मुझे. चोद दो मुझको अपने लंड से. और फिर मैंने भी अपना लंड उनकी गीली चूत के अन्दर डाल दिया और फिर मैं अपनी पूरी रफ़्तार से उनको चोदने लग गया था. और वह चोदो मुझे और जोर से चोदो आआहह… करके सिसकारी भरने लग गई थी. और फिर इसी बीच मेमसाहब ने फिर से अपना पानी छोड़ दिया था. और फिर करीब 20-25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मैं भी उनकी चूत में ही ढेर हो गया था और फिर मैं उनके ऊपर ही लेट गया था इस प्रकार हमने उस दिन 3 बार सेक्स किया।

और फिर मैंने अपने कपड़े ठीक किये और मैं दुकान पर चला गया. साहब ने मुझे खूब डांटा और पूछा कि, इतना लेट क्यूँ हो गया? तो मैंने कहा मेमसाहब का पैर दर्द हो रहा था इसलिए मैं उनकी मालिश करने लग गया था. तो साहब ने कहा, क्या मालिश? क्या तुम मेमसाहब की मालिश करते हो? तो मैंने उनको कहा कि, हाँ साहब मैं तो रोज ही मालिश करता हूँ. बस इतना सुनते ही साहब ने मुझे नौकरी से निकाल दिया और बहुत मारा भी।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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