✽ रोजाना नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ ✽

वो लड़का बहुत याद आता है

0
loading...

प्रेषक :- वीना…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम वीना है, मैं इन्दौर के पास ही के एक छोटे से कस्बे की रहने वाली हूँ मेरी उम्र 28 साल की है और मैं एक शादीशुदा औरत हूँ. मैं दिखने में बहुत खूबसूरत हूँ, मेरा रंग गोरा है, मेरी लम्बाई 5.6 फुट की है और मेरा फिगर 34-30-36 का है जिसको देखते ही लड़कों की पेन्ट में हलचल शुरु हो जाती है. अब मैं आपका ज्यादा समय ना लेते हुए सीधा कहानी पर आती हूँ।

दोस्तों यह कहानी आज से 3 साल पहले की है जब मैं एक कम्प्यूटर कोर्स करने की लिए इन्दौर के एक इन्स्टिट्यूट में पढ़ने गई थी. मेरी क्लास में और भी कई लड़कियाँ थी लेकिन ज्यादातर लड़के मुझको ही लाइन मारते थे. और मैं भी उन लड़कों के पूरे मजे लेती थी. मेरे सीनियर भी पूरे दिन मेरे आगे-पीछे चक्कर लगाते रहते थे। दोस्तों मेरी क्लास में एक लड़का था जिसका नाम विनय था. वह बहुत सीधा साधा और गाँव का रहने वाला लड़का था. विनय जबलपुर के किसी गाँव का रहने वाला था, वह दिखने में भी बहुत सुन्दर और हैंडसम था. मेरी क्लास की हर लड़की उसको पसन्द करती थी. वह पढ़ने में बहुत तेज था सभी टीचर्स और स्टूडेंट उसको पसन्द करते थे. वह हमारे इन्स्टिट्यूट का सबसे होशियार लड़का था और वह सबकी बहुत मदद करने वाला भी था. शुरू-शुरू में तो मैं उसको सिर्फ़ एक सहपाठी की तरह ही देखती थी. वह पूरे दिन सबको अपनी बातों से हँसाता रहता था और हमेशा ही वह खुद भी खुश रहता था. लड़कियाँ उससे हमेशा ही चिपकी रहती थी. दोस्तों इंस्टीट्यूट में हमारा एक ग्रुप था जिसमें हम 8-10 लड़कियाँ थी. हमारे ग्रुप में से मेरी एक सहेली ने विनय से दोस्ती कर ली थी और फिर हमने उसको भी हमारे ग्रुप में शामिल कर लिया। अब मेरी भी उससे रोज ही बातें होने लग गई थी. वह हमारी पढाई से सम्बन्धित सभी समस्याओं को हल कर देता था. और फिर मैं भी उसकी तरफ आकर्षित होने लग गई थी. वह काफ़ी अमीर परिवार से था इसलिए वह हमेशा नए-नए कपड़ों में रहता था. मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से थी तो मेरे ऊपर बहुत सी पाबंदियाँ भी थी. दोस्तों मैं फिर उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लग गई थी और फिर धीरे-धीरे वह भी मुझको पसन्द करने लग गया था. लेकिन हम दोनों ने यह एक दूसरे को महसूस नहीं होने दिया था लेकिन हमारे ग्रुप के बाकी लोगों को हम दोनों के प्यार के बारे में पता चल गया था. तो मेरी सहेली ने यह सब उसको बोल दिया और मुझको भी कह दिया की विनय भी मुझको बहुत पसन्द करता है, लेकिन फिर भी हम दोनों ने एक-दूसरे को यह बोलने में 3-4 महीनें लगा दिए थे. और फिर एक दिन उसने फोन पर मुझको आई.लव. यू. बोल ही दिया था. उस दिन मैं इतनी खुश थी कि, जैसे मेरी कोई लॉटरी निकल आई हो. वह मुझको अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था और वह मुझसे शादी भी करना चाहता था और मैं भी उससे शादी करना चाहती थी. लेकिन जब भी कोई और लड़की उससे बात करती थी तो मुझको बहुत बुरा लगता था. मैं उसको लेकर बहुत स्वार्थी सी हो गई थी. और फिर उसने मेरे लिए दूसरी लड़कियों से बात करना भी कम कर दिया था. वह इन्स्टिट्यूट में ही होस्टल में रहता था और महीने में 1 बार अपने गाँव जाता था. एक बार वह अपने घर गया हुआ था और फिर वह वहाँ से पूरे 15 दिन के बाद वापस आया तो मैंने उससे नाराज़ होकर बात नहीं करी तो वह मुझसे बोला कि, वह अब हमेशा के लिए यहाँ से जा रहा है. उसकी इस बात को सुनकर तो मेरी तो जैसे जान ही निकल गई थी और मैं रोने लग गई थी. तो फिर वह मुझसे बोला कि, मैं तो मज़ाक कर रहा था।

दोस्तों दिन में 1 से 2 बजे तक हमारा लंच होता था और हम सब कैंटीन में बैठकर खाना खाते थे. एक दिन वह लंच में खाना खाने के लिये कैंटीन में नहीं गया और वह वहीं पर क्लास में ही बैठा रहा और क्लास के सभी लड़के और लड़कियाँ लंच की लिए कैंटीन में चले गए थे. और अब क्लास में मैं और विनय हम दोनों ही थे और हम एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बातें कर रहे थे तो उसने अचानक से मुझको एक किस कर लिए था लेकिन मुझको वह बहुत अच्छा लगा था। और फिर तो रोज़ ही हम लंच में क्लास में ही बैठे रहने लगे और एक दूसरे को किस करने लग गए थे जिससे अब मेरे अन्दर भी कुछ-कुछ होने लग गया था. और फिर धीरे-धीरे मुझको सेक्स करने की इच्छा होने लग गई थी. और फिर एक दिन मैंने विनय को बोला कि, विनय मैं तुम्हारे साथ एकबार सेक्स करना चाहती हूँ तो वह मुझसे बोला कि, यह सब शादी से पहले ठीक नहीं है. तो फिर मैंने उसको कहा कि, वैसे भी हम दोनों को एक-दूसरे से ही शादी करनी है तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. तो फिर उसने मुझको कहा कि, हम शादी के बाद ही सेक्स करेंगे लेकिन मुझको तो सेक्स करने का जैसे बुखार चढ़ा हुआ था तो मैंने उसको जोर देकर मेरे साथ सेक्स करने के लिए राज़ी कर लिया था. लेकिन अब यह दिक्कत थी कि, सेक्स किया कहाँ जाए?

loading...

दोस्तों विनय का हॉस्टल हमारी क्लास के कमरे की ऊपर ही था. ग्राउंड फ्लोर पर कम्प्यूटर लेब, ऑफिस, लाइब्रेरी और क्लासरूम थे और ऊपर वाले फ्लोर पर हॉस्टल था. और फिर विनय ने मुझको बोला की नीचे वाले फ्लोर पर एक कमरा खाली है तो मैं हॉस्टल वॉर्डन और प्रिन्सिपल को बोलकर उस कमरे में शिफ्ट हो जाता हूँ। वह कमरा बिल्कुल हमारी क्लास के कमरे की सामने ही था और बीच में सिर्फ़ एक गैलेरी और  बिल्डिंग में ऊपर जाने वाली सीढीयाँ थी. और फिर कुछ ही दिन में वह उस कमरे में शिफ्ट हो गया था. और फिर हमने प्लान बनाया कि, जब लंच के समय सब लंच के लिये कैंटीन में चले जाएँगे तो मैं विनय के कमरे में घुस जाऊँगी. और फिर फिर वह दिन भी आ ही गया जब मैं अपनी इच्छा को पूरी करने वाली थी. प्लान के मुताबिक मैं लंच के समय विनय के कमरे में चली गई और मेरे अन्दर जाते ही उसने कमरे को बन्द कर लिया था और फिर हमारे पास सिर्फ़ 1 घंटा था. तो फिर जाते ही हम दोनों शुरु हो गये उसने मुझे उल्टा  अपने बेड पर लिटा दिया और मुझको पागलो की जैसे चूमने लग गया मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी. 5 मिनट चूमने की बाद उसने मेरे कपड़े उतारने शुरु कर दिए थे और फिर एक ही मिनट के बाद मैं सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में आ गई थी और फिर उसने अपने कपड़े भी निकाल दिए थे और अब वह सिर्फ़ अंडरवियर में ही था. उसके अंडरवियर में से उसका फूला हुआ लंड साफ दिखाई दे रहा था जो कि काफी बड़ा लग रहा था. और फिर उसने मेरी ब्रा को भी निकाल दिया और फिर वह मेरे एकदम गोरे और बड़े बब्स को देखकर पागल सा हो गया था. और फिर वह एक भूखे शेर की तरह मेरे बब्स पर टूट पड़ा था. वह मेरे बब्स को बुरी तरह से चूस और चाट रहा था और मैं सिसकियाँ ले रही थी।

उसका एक हाथ मेरी चूत पर चला गया था और फिर वह मेरी पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत की चुसाई करने लग गया था. और उसके ऐसा करने से मैं पागल सी हुई जा रही थी. मेरी पैन्टी भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. और फिर उसने मेरी पैन्टी को एक ही झटके में पकड़कर फाड़ दिया था. अब मेरी एकदम गोरी और बिना बालों वाली गुलाबी चूत उसकी आँखों के सामने थी. मैंने एक दिन पहले ही अपनी चूत की सारे बालों को साफ कर लिया था. मेरी चूत को देखते ही उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा होने लग गया था और फिर उसने अपने होठों को मेरी चूत पर रख दिया तो मैं एकदम से उछल पड़ी थी और उस समय मुझको ऐसा लगा कि, जैसे किसी ने मेरी आग की तरह सुलगती हुई चूत पर बर्फ रख दी हो. मैं तो जैसे किसी जन्नत की गलियों में थी. अब वह मेरी चूत को बुरी तरह से चाटने लग गया था. वह बीच-बीच में अपनी जीभ को जब मेरी चूत में डाल देता था तो मेरी जान ही निकल जाती थी. और फिर 5 मिनट में ही मेरी चूत का लावा फूट पड़ा था और मैं एकदम निढाल होकर के बेड पर पड़ गई थी। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

अब उसने उठकर अपना अंडरवियर निकाल दिया और फिर उसके अंडरवियर के निकलते ही उसका लंड हवा में लहराने लगा. उसके लंड को देखते ही मैं डर गई थी, उसका लंड 7” लम्बा और 2.5” मोटा था. और फिर मैंने उसको कहा कि, मैं इसको अपनी चूत में नहीं ले पाऊँगी क्योंकि मैं अभी एकदम कुँवारी हूँ. तो उसने मुझको कहा कि, डरो मत तुमको कुछ भी नहीं होगा बस पहलीबार में थोड़ा सा दर्द होता है और फिर मज़ा भी बहुत आता है. और फिर उसके बहुत समझाने पर मैं मान गई थी. और फिर उसने मुझे उसका लंड चूसने को कहा तो मैंने मना कर दिया. तो उसने मुझे जोर देकर कई बार बोला तो मैं मान गई और डरते-डरते मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा. उसका लंड इतना मोटा था की मेरे हाथ में भी ठीक से नहीं आ रहा था. और फिर मैंने धीरे-धीरे उसको चूसने की कोशिश की लेकिन वह मेरे मुहँ में आ ही नहीं रहा था. और फिर 5 मिनट तक चूसने के बाद मैं भी एकबार फिर से गर्म होने लग गई थी. वह अपने एक हाथ से मेरे बब्स को दबा रहा था और दूसरे हाथ से मेरी चूत को सहला रहा था. फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटने को कहा तो मैं लेट गई थी. और फिर उसने पास ही की टेबल से तेल की शीशी से बहुत सारा तेल लेकर अपने लंड पर लगा लिया और बहुत सारा तेल मेरी चूत पर भी लगा दिया था. और फिर उसने एक तकिया मेरे कूल्हों के नीचे लगा दिया था. और फिर मेरे दोनों पैरों के बीच में आकर उसने अपनी पोजीशन बना ली थी। और फिर मैंने डरते हुए उसके लंड को देखा जो कि, मेरी चूत में जाने के लिए एकदम तैयार था. और फिर विनय ने मेरे पैरों को अपने दोनों साइड पर रख लिया था और फिर वह अपने लंड को मेरी चूत पर रखकर रगड़ने लग गया था. और फिर उसके ऐसा करने से मैं काबू से बाहर होने लगी और मैं उसके लंड को अपनी चूत में लेने के लिए मचलने लग गई थी।

और फिर मैंने विनय को बोला कि, प्लीज अब जल्दी से अन्दर डाल भी दो अब मुझसे सहन नहीं हो रहा है. तो विनय ने अपना लंड मेरी चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्का लगाया लेकिन मेरी चूत बहुत टाइट थी इसलिए उसका लंड अन्दर जाने के बजाए फिसल गया. तो फिर उसने फिर से अपने मोटे लंड को मेरी चूत पर रखा और अपने होठों को मेरे होठों पर लगाकर के एक ज़ोर का धक्का लगा दिया जिससे मेरी तो जान ही निकल गई थी. उसका लंड 3” तक मेरी चूत के अन्दर घुस गया था. मैं चिल्लाना तो बहुत चाहती थी पर उसके होंठ मेरे होठों को सील किए हुए थे. और फिर उसने एक और धक्का लगा दिया और उसका लंड 5” तक मेरी चूत में घुस गया था और मेरी चूत फट गई थी और मेरी आँखों में से आँसू आने लग गये थे. लेकिन फिर विनय ने एक और धक्का लगा दिया अब उसका पूरा का पूरा लंड 7” का मेरी चूत के अन्दर अन्दर चला गया था और मैं बेहोश हो गई थी. और फिर जब मुझको होश आया तो वह मेरे सामने पानी लिए हुए खड़ा था और उसका लंड मेरे खून से लाल हो गया था. बेडशीट भी मेरी चूत के खून की वजह से एकदम लाल हो गई थी।

और फिर जब मैंने अपनी चूत की तरफ़ देखा तो वह सूज गई थी और वह खून से भरी हुई थी. और फिर मैंने उसको बोला कि, यह तुमने क्या कर दिया? तो वह मुझसे बोला पहलीबार तो यह सब होता ही है, अब तुम्‍हारी चूत की सील टूट गई है तो अब तुम्हे सेक्स करने में और भी ज्यादा मजा आएँगा. और फिर उसने मुझे एक टैबलेट दिया और बोला की अब तुम्हें इससे आराम मिल जाएगा. लेकिन फिर जब मैंने टाइम देखा तो लंच खत्म होने में सिर्फ 10 मिनट ही बाकी थे तो मैंने बेड से उठने की कोशिश करी तो मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुआ तो उसने मुझे उठाया और बाथरूम में ले जाकर के मेरी चूत को साफ कर दिया और फिर उसने मेरी चूत पर दवाई लगाई तो 5 मिनट के बाद मुझे कुछ राहत महसूस हुई तो उसने मुझे मेरे कपड़े दिए और फिर उसने उसके कमरे का थोड़ा सा दरवाजा खोलकर के देखा कि, बाहर गैलेरी में कोई है तो नहीं. और फिर गैलेरी में कोई भी नहीं था तो उसने मुझे इशारा किया और फिर मैं अपने कपड़े पहनकर के उसके कमरे से निकलकर सीधी अपनी क्लास वाले कमरे में चली गई थी।

उसके बाद तो दोस्तों हमने और भी कई बार उसके कमरे में सेक्स किया. वह मुझे बहुत प्यार करता था लेकिन फिर मेरे घर वालों को मेरे और उसके सम्बन्धों के बारे में पता चल गया था तो उन्होंने मेरी जबरदस्ती किसी और से शादी करवा दी थी. दोस्तों आज मेरी शादी को पूरे 3 साल हो चुके है लेकिन अब भी मुझे उसकी बहुत याद आती है।

धन्यवाद कामलीला के प्यार पाठकों !!

Share.

Comments are closed.

error: