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सेठ की बेटी की चूत बनी नोट छापने की मशीन

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प्रेषक :- प्रदीप…

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रदीप है, अभी मेरी उम्र 29 साल की है और मैं ग्वालियर का रहने वाला हूँ. दोस्तों आज मैं आप सभी लोगों के साथ अपना एक बहुत ही निजी अनुभव बाँटने जा रहा हूँ जो कि 3 साल पहले मेरे साथ हुई एक बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी घटना पर आधारित है. दोस्तों मैंने अभी तक कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था पर इस बार मेरी किस्मत एकदम से मेरे ऊपर मेहरबान होगी ऐसा मैंने कभी सोचा भी नहीं था। उस घटना के बाद तो मैंने अभी तक अलग-अलग कई लड़कियों के साथ सेक्स किया है। और अब तक मैं कई लड़कियों को चोदकर सन्तुष्ट भी कर चुका हूँ। चलिए अब मैं आपका ज़्यादा समय ना लेते हुए अपने मालिक की बेटी शिवानी के साथ हुए मेरे पहले सेक्स अनुभव को बताता हूँ कि, किस तरह से पहले उसने मुझे फंसाया और फिर मुझपर दबाव देते हुए मुझसे अपनी मस्त चुदाई भी करवाई।

दोस्तों सभी लोग ड्राइवर की नौकरी को बहुत अच्छा नहीं मानते है, लेकिन वह लोग यह नहीं जानते कि, ड्राइवर सबसे ज़्यादा मज़े लेता है. दोस्तों अगर मालकिन खूबसूरत हो और उसकी खूबसूरत बेटी हो या उसकी सहेलियाँ हो तो ड्राइवर उन सबकी खूबसूरती का रसपान करता है। मैं एक बड़े सेठ के लिए काम करता हूँ और उसकी बीवी तो काफ़ी समय पहले ही मर चुकी है, लेकिन उनकी एक बहुत ही खूबसूरत बेटी है और वह कॉलेज में पढ़ती है और मेरी ड्यूटी उसकी सेवा में है। मैं सही मायने में उसकी खूब सेवा करता हूँ. वह जब भी मुझे बुलाती है तो मुझे उसके पास जाना पड़ता है और उसकी चूत और गांड को बजाकर उसकी सेवा करनी पड़ती है।  वैसे मेरा सेठ भी काफी आशिक मिज़ाज़ का है और वह गाड़ी में अक्सर नई-नई लड़कियों के साथ आता है और उनके साथ खेलता है और कभी-कभी तो वह सुनसान सड़क का फ़ायदा उठाते हुए लड़कियों की कार में ही चुदाई कर देता है और मैं बाहर खड़े होकर पहरा देता हूँ।  और अब मुझे आपको यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि, मैं सेठ और उनकी बेटी दोनों की बातें छिपाने के लिए उनसे मोटे पैसे वसूलता हूँ। दोस्तों एक बार सर्दियों की एक रात थी और सेठजी की बेटी ने मुझे शाम को अपने फार्म हाउस पर जाने के लिए गाड़ी निकालने के लिए बोला और उसके साथ उसकी किसी सहेली को भी जाना था, लेकिन उसका वहाँ जाने का प्रोग्राम बदल गया था. और फिर हम दोनों ही निकल चुके थे और शिवानी वापस घर पर नहीं आना चाहती थी और फिर अचानक से शिवानी ने मुझे बोला कि, प्रदीप चल किसी ठेके पर ले चल आज मुझे दारू पीनी है। दोस्तों मुझे पता था कि, वह बहुत ठर्की और पियककड़ है. और फिर मैंने ठेके पर गाड़ी रोक दी थी और उससे पैसे लेकर मैं उसका ब्रांड ले आया। और फिर उसने मुझे बोला कि, चल अब अपने फार्म हाउस के नज़दीक कहीं ले लो, अन्दर मत जाना बाहर ही काफ़ी खाली जगह है, जो काफी सुनसान रहती है और वहाँ पर कोई आता-जाता भी नहीं है। और फिर वहाँ पर मैंने पहुँचकर गाड़ी एक साइड में लगा दी और तब तक पूरी तरह अंधेरा भी हो चुका था और मैंने गाड़ी साइड में इस तरह से लगाई कि, वह अचानक से किसी को दिखे ना. और फिर उसने शराब की बोतल खोल ली थी और मैं गाड़ी से बाहर जाने लगा, तो उसने मुझे रोका और एक ग्लास देते हुए वह मुझसे बोली कि, तुम भी मेरे साथ पियोगो. लेकिन मैंने उसको मना किया तो वह एकदम से आग-बबूला होने लगी और बोली कि, मैं तुमसे पूछ नहीं रही हूँ, बल्कि ऑर्डर दे रही हूँ। और फिर मैं उसके साथ पीने लगा तो मुझे 2 पेग में ही चढ़ गई थी और मेरे सिर पर नशा सा होने लग गया था. और फिर उसने उसी बात का फ़ायदा उठा लिया और फिर उसने मेरा हाथ अपनी जाँघ पर रखा और उसने मेरा हाथ अपनी पैन्टी में डलवा लिया था और फिर उसने उन सबका उसके फोन में एक वीडियो बना लिया था।

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और फिर मैंने एकदम से अपना हाथ पीछे खींच लिया और फिर उससे बोला कि, शिवानी मेम यह आप क्या कर रही हो? यह सब ग़लत है. और फिर उसने अपने नकली गुस्से से मुझसे बोला कि, अगर तुम अपनी सलामती चाहते हो तो तुम मेरे बदन की हवस को अभी बुझाओ वरना, यह वीडियो मैं पापा को दिखाकर तुम्हें नौकरी से निकलवा दूँगी। दोस्तों नौकरी का जाना मुझे गवारा नहीं था तो फिर मैंने उसकी बात मान ली और फिर मैंने पीछे की सीट को ठीक किया और अब तक वह 4-5 पेग पी चुकी थी और अब वह पूरे नशे में थी. और फिर उसने जोश ही जोश में अपने सारे कपड़े खोल दिए थे और अब वह मेरे सामने अपनी ब्रा-पैन्टी में आ गई थी. दोस्तों वह शक्ल से तो बहुत खूबसूरत थी ही लेकिन बिना कपड़ों के उसकी कमसिन जवानी भी क्या गजब ढा रही थी। उसके गोल और बड़े-बड़े बब्स और चिकना बदन देखते ही मेरी इच्छा ना होते हुए भी मेरे लंड में तनाव आ गया था और मेरे लंड के उभार को देखते हुए वह हँस पड़ी थी और फिर वह मुझसे बोली कि, हो गया तुम्हारा यह हरामी खड़ा? और फिर उसने मेरी पेन्ट को पकड़ा और फिर वह उसका बटन खोलने लगी और बोलने लगी कि, निकाल साले इस हरामी को बाहर। और फिर मैंने अपने पूरे कपड़े खोल दिए और मैं पूरी तरह से नंगा हो गया था. दोस्तों मेरे शरीर पर बाल नहीं थे और मैं अपने लंड के बाल भी साफ करता रहता था. और फिर मुझे देखकर शिवानी हँसने लगी और फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और फिर वह उसको दबाने लगी और साथ ही वह मेरे अंडो को भी दबाने लगी जिनमें बहुत दर्द भरा था और वह उनको बड़ी ही मस्ती में बेदर्दी से मसल रही थी और साथ ही वह बार-बार बोलती भी जा रही थी कि, साले तू मेरा नौकर है आज तू मुझको एक रंडी बनाकर चोद।

और फिर मैंने उसके पास आकर उसको होठों को चूमने की कोशिश की, तो उसने मेरे गाल पर एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया और फिर वह मुझसे बोली कि, कुत्ते अपनी औकात मत भूल मेरी चूत और गांड की आग को बुझा मेरे मुहँ की और होठों की भी तेरा लंड ही बुझाएगा और फिर उसने एक दम गप करके मेरा लंड अपने मुहँ में रख लिया और उस समय मैं खड़ा था और मेरा हाथ मेरी कमर पर चला गया था और फिर मैंने अपनी कमर को हिला-हिलाकर उसके मुहँ को चोदना शुरू कर दिया था जिससे उसके मुहँ से गूं…गूं… की आवाजें निकल रही थी। और फिर वह मेरे लंड को अपने हाथों से मसलते हुए मेरे लंड को मस्ती में चूसती जा रही थी जिससे मेरा लंड पूरा का पूरा गीला हो चुका था और उसके मुहँ से थूँक निकलकर मेरे लंड पर और पूरी गाड़ी में गिरने लग गया था. और फिर वह मेरे लंड को अपने मुहँ से बाहर निकालकर पीछे होकर बैठ गई थी और फिर उसने अपनी टाँगें हवा में उठा ली थी और अब मुझको उसकी गुलाबी चिकनी चूत दिखाई दे रही थी जिसपर एक भी बाल नहीं था। उसकी चूत एकदम गोरी चिकनी और लाल थी लेकिन वह फिर भी कुँवारी नहीं थी। और फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड लगाना चाहा तो वह एकदम से चिल्ला पड़ी और वह मुझसे बोली कि कुत्ते, पहले इसे अपने मुहँ से चाट और फिर एकदम मस्त तरीके से गीला कर। और फिर मैंने थोड़ा झुककर अपनी जीभ को उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा. और फिर उसने मेरे सर को बालों से पकड़ लिया और फिर वह उसको अपनी दोनों टाँगों के बीच में घुसाने लग गई थी. दोस्तों अब मेरा मुहँ पूरा उसकी चूत में था और मेरी नाक तक उसकी चूत में घुसने लग गई थी और मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से लपा-लप करके चाट रहा था, लेकिन मुझे अब लग रहा था कि अब मुझे उसकी चूत में लंड डालना है क्योंकि पता नहीं मैं कब झड़ जाऊँ। और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके हाथों को कसकर पकड़ा और उठ गया और फिर मैं अपने लंड को उसकी चूत पर लगाकर धीरे-धीरे उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा जिससे उसके मुहँ से बड़ी ही मादक सी आवाजें निकलने लग गई थी आहह… इस्सस… और जोर से रगड़ो अपने लंड को मेरी चूत पर आहह… ओहह… बड़ा मज़ा आ रहा है। और फिर मैंने एकदम से उसकी चूत में धक्का मार दिया था. दोस्तों मेरा लंड और उसकी चूत दोनों ही बहुत गीले थे इसलिए मेरा लंड एकदम से उसकी चूत के अन्दर घुस गया था. और फिर मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर जाकर टकराने लग गया था। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और उससे शिवानी सिसकियाँ भरने लग गई थी उई मार डाला साले तूने तो, और जोर से मार, जोर से झटका दे मेरी चूत में। और फिर मैंने अपना लंड थोड़ा और आगे डालना चाहा तो उसकी चूत गीली होने की वजह से मेरा पूरा लंड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया तो शिवानी और भी जोर-जोर से चिल्लाने लगी और उसकी एक जोर की चीख निकल गई थी. और फिर मैं रुक गया था तो शिवानी मुझसे बोली कि, प्लीज रुको मत, मारो धक्के और जोर-जोर से चोदो मुझे, मेरी चूत बहुत प्यासी है। और फिर मैं भी जोर-जोर से उसकी चूत में धक्के मारता गया और फिर मेरे 8-10 ज़ोरदार धक्कों से ही वह झड़ गई थी और उसने अपने दोनों पैरों को बन्द कर लिया था और फिर वह एक साइड में गिर गई थी. और फिर उसने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाल दिया था और फिर वह मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर मूठ मारने लग गई थी. और फिर 5-7 मिनट के बाद जब मेरा माल निकलने वाला था तो मेरी कमर भी तेज-तेज हिलने लग गई थी तो वह समझ गई थी और फिर उसने मेरे लंड को अपने मुहँ के पास कर लिया था और फिर जैसे ही मेरा माल निकला उसने वह सारा अपने मुहँ में ले लिया और पी गई थी। और फिर उसने मेरे लंड के टोपे को भी चाट-चाटकर अच्छी तरह से साफ कर दिया था. और फिर हम दोनों कपड़े पहनकर फॉर्म हाउस में चले गये थे. और फिर उसकी चुदाई के बदले में उसने मुझे काफ़ी पैसे दिए थे. दोस्तों अब तो मैं सालों से उसकी और उसकी सहेलियों की जमकर सेवा कर रहा हूँ और मज़े ले रहा हूँ और खूब नोट भी छाप रहा हूँ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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